अयोध्या के बाद आगे क्या?

अयोध्या पर फैसले के साथ ही भाजपा के दो ऐतिहासिक वादे पूरे हो जाएंगे। पहले उसने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटा दिया। इसके बाद भाजपा के नेताओं ने दावा किया कि अब जाकर कश्मीर का भारत में पूरी तरह से विलय हुआ है। इसे भारत का दूसरा एकीकरण बताया जा रहा है। ध्यान रहे कश्मीर मुद्दे पर राजनीति करने के लिए भारतीय जनसंघ का गठन हुआ था। 1951 में बनी भारतीय जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक देश- एक विधान, एक निशान और एक प्रधान का नारा दिया था और कश्मीर गए थे। वहीं संदिग्ध स्थितियों में उनका निधन हुआ था। तब से जनसंघ और फिर भाजपा का नारा था- जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है। इस साल पांच अगस्त को सरकार ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने का वादा पूरा कर दिया।

भाजपा का दूसरा ऐतिहासिक वादा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का है। एकाध मौकों को छोड़ कर हर बार भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में यह मुद्दा शामिल रहा है। भाजपा इसी मुद्दे पर राजनीति करके दो सीटों से आज 303 सीट तक पहुंची है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। इन दो के अलावा भाजपा के पास तीसरा मुद्दा समान नागरिक संहिता का था। भाजपा शुरू से इन तीन मुद्दों पर चुनाव लड़ती रही है। इस दिशा में भी सरकार ने पहल कर दी है। मुस्लिम समाज में प्रचलित एक बार में तीन तलाक बोलने को अवैध घोषित कर दिया गया है और अब सरकार ने इसे कानूनी रूप से अपराध भी बना दिया है।

एक तरह से भाजपा ने केंद्र की सरकार में आने के पांच साल में कश्मीर, अयोध्या और समान नागरिक संहिता का वादा पूरा करने का ठोस प्रयास किया है। तभी अब सवाल है कि इससे आगे क्या होगा? क्या इन मुद्दों के बाद भाजपा अब मुख्यधारा की दूसरी पार्टियों की तरह रोजमर्रा के सामान्य मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी? इसकी संभावना कम है। भाजपा के लिए अब भी पाकिस्तान और राष्ट्रवाद का मुद्दा मुख्य राजनीतिक मुद्दा है। बात बात में उसके नेता अपने विरोधियों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं। भाजपा के इस एजेंडे को समझते हुए इन दिनों मीडिया पर सारे दिन पाकिस्तान को लेकर चर्चा चल रही होती है। पिछले दिनों नंबर एक न्यूज चैनल के एक कार्यक्रम में शामिल एक वक्ता ने बताया कि पिछले तीन-चार महीने में चार सबसे बड़े चैनलों पर हुई बहस में 80 बहस पाकिस्तान के ऊपर थी। सो, कोर मुद्दा पाकिस्तान है। क्योंकि उसी से भारत का राष्ट्रवाद परिभाषित होता है और हिंदू-मुस्लिम का नैरेटिव भी उसी से बनता है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आजादी का मुद्दा भी इसी से जुड़ा है। माना जा रहा है कि अगले चुनाव से पहले पाकिस्तान पर चढ़ाई औऱ पीओके को मुक्त कराना भाजपा के प्रचार का मुख्य मुद्दा हो सकता है।

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