यह कोई बड़ी बात नहीं!

यह मोदी सरकार का ताजा अधिकृत जुमला है। केंद्र सरकार का राज्यसभा में जवाब है। सवाल था जीडीपी क्यों घट रही है तो केंद्रीय मंत्री का जवाब था विकास दर का घटना बहुत बड़ी बात नहीं है। यह वाक्य, यह एप्रोच मौजूदा भारत में मोदी सरकार का सार है! तब सवाल है भारत सरकार के मायने में बड़ी बात क्या है? भारत के हम लोगों के लिए बड़ी बात क्या है? विकास न हो, विकास घटे कोई बड़ी बात नहीं। बेरोजगारी बढ़े कोई बड़ी बात नहीं। काम-धंधे चौपट हो तो वह भी बड़ी बात नहीं। आए दिन बलात्कार हो तो वह भी बड़ी बात नहीं। समाज भटके-बिखरे कोई बड़ी बात नहीं। सामूहिक हिंसा, लिंचिग का सिलसिला बने-बढ़े तब भी बड़ी बात नहीं। मीडिया, अदालत, कार्यपालिका, विधायिका, लोकतंत्र की तमाम संस्थाएं, एजेंसियां विश्वसनीयता खोती जाए तो बड़ी बात नहीं। पड़ोस में भारत विरोधी सरकारे बनती जाए, चीन का रूतबा फैलता जाए तो वह भी बड़ी बात नहीं। व्यापार घाटा बढ़ता जाए तो वह भी बड़ी बात नहीं!

आखिर यह एप्रोच मोदी सरकार की कैसे हुई तो जाहिर है इसके पीछे सोच है कि पहले तो बड़ी बात मान, हकीकत, सत्य को स्वीकारने का साहस नहीं है। यह भी सोच है कि नया क्या है जो इसे बहुत बड़ी बात मान चिंता करें। विकास दर पहले भी घटती थी, बलात्कार पहले भी होते थे, लिंचिंग पहले भी होती थी, बेरोजगारी पहले भी थी मतलब भारत में पहले भी वे सब गड़ब़ड़ियां, कमियां थी जो अब है तो नया क्या, बड़ी बात क्या!

लेकिन तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं थे, अब है तो भला वे स्थितियां क्यों जो पहले होती थी। उस नाते मोदी के रहते यह सब होना तो एवरेस्ट जैसी बड़ी बात होनी चाहिए। नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के रहते आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, लोकतांत्रिक, विदेश नीति आदि के तमाम पहलूओं में कैसे इतनी दुर्दशा है? कैसे ऐसी एप्रोच है? पिछली सरकारों में तो कभी यह नहीं हुआ कि मंदी हो, विकास दर घटे और सरकार कहे कि मंदी नहीं है, बेरोजगारी नहीं है! तब सरकार भी चिंता जताती थी और जनता में भी हल्ला होता था।

उस नाते आज जैसा वक्त आजाद भारत के 72 साल के इतिहास में पहले कभी नहीं आया। कुछ भी ठिक नहीं है लेकिन सरकार का स्टेंड है कि सब ठिक है और यदि आंकड़े जैसी हकीकत में कोई सवाल हुआ तो जवाब होगा कि यह कोई बड़ी बात नहीं। पहले विकास दर गिरती थी तो हल्ला होता था। सरकार के हाथ-पांव फूलते थे। लोग खदबदाते थे। मीडिया पिल पडता था जबकि अब कोई बड़ी बात नहीं इसलिए जैसे रामजी रखेंगे वैसे रह लेंगे!

मैं 1975 से सरकार और देश दशा की सुध में जीता रहा हूं। इमरजेंसी के उस वक्त में भी सतह के नीचे बैचेनी थी। राजनीति ठहरी हुई थी पर सियासी खुसर-पुसर लिए हुए थी। तब से अब तक के कोई ग्यारह-बारह प्रधानमंत्रियों की सरकार में ऐसा वक्त कभी नहीं था जिसमें यह सुनने को मिला कि विकट-खराब स्थिति के बीच सुना कि यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है क्योंकि पहले भी ऐसा होता था।

प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में यह अधिक सुना गया था कि नेहरू या पिछली सरकारों ने बरबादी की तो अब उसे ठिक किया जा रहा है। पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों, सरकारों पर दोष मढ़ प्रधानमंत्री मोदी अपने नए संकल्पों ( काला धन-भ्रष्ट्राचार, मैक इन इंडिया, स्टार्टअप आदि-आदि), नए जुमलों से भारत के बदलने का विश्वास पैदा किए हुए थे। वह एप्रोच दूसरे कार्यकाल में गायब है। अब या तो मौन है, या यह नया वाक्य है कि यदि बदहाली है, विकास घटा है, लिंचिंग है, बलात्कार है तो यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है! पहले भी ऐसा होता रहा है!

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