मुश्किल समय की चीफ जस्टिस की चिंता!

यह बात चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबड ने कही है। उनके सामने एक याचिका आई थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा था कि सर्वोच्च अदालत संशोधित नागरिकता कानून को संवैधानिक घोषित करे। यह हैरान करने वाली याचिका थी और चीफ जस्टिस ने सही ही हैरानी जताते हुए कहा कि पहली बार किसी कानून को संवैधानिक घोषित कराने के लिए याचिका दायर की गई है। ध्यान रहे संसद से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून संवैधानिक ही होता है, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट उसे असंवैधानिक न घोषित कर दे। सो, सुप्रीम कोर्ट में याचिका कानून को असंवैधानिक घोषित कराने के लिए आती है पर एक अति उत्साही याचिकाकर्ता कानून को संवैधानिक घोषित कराने पहुंच गया। इस पर टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि देश इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि देश में हिंसा रूके तभी वे इस मसले पर सुनवाई करेंगे।

चीफ जस्टिस ने यहीं बात करीब एक महीने पहले भी कही थी। दिसंबर के दूसरे हफ्ते में जब पुलिस अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में घुसी और छात्रों के साथ मारपीट हुई और फिर दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में घुस कर लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे छात्रों की पिटाई की तब कुछ वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उस समय भी चीफ जस्टिस ने उनसे कहा था कि वे हिंसा बंद कराएं उसके बाद सुनवाई होगी। इसके अगले दिन सुनवाई हुई और जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह ऐसा आदेश नहीं दे सकती है कि लोग पुलिस पर पथराव करते रहें और पुलिस चुपचाप देखती रहे।

उसके बाद से जैसे देश की पुलिस को प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी चलाने, उन पर मुकदमा करने, पकड़ कर जेल में डालने या उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने का लाइसेंस मिल गया है। उत्तर प्रदेश की पुलिस के पिछले एक महीने का कारनामा इसकी मिसाल है। पुलिस ने लोगों पर लाठी चलाई और आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर लोगों से ही इसका खर्च वसूलने का काम शुरू किया। बिना किसी सबूत के लोगों को उठा कर जेल में डाल दिया, जहां से अब लोगों की जमानतें हो रही हैं। दर्जनों लोग अब भी जेल में बंद हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। हालांकि उत्तर प्रदेश की पुलिस की असलियत अपने कारणों से अलग जाहिर हो रही है। एक महिला से अश्लील चैटिंग के आरोप में फंसे एक एसएसपी ने मुख्यमंत्री और डीजीपी को चिट्ठी लिख कर पोल खोली है कि कैसे जिलों में एसपी के पद लाखों रुपए में बेचे जा रहे हैं और कौन-कौन बड़ा आदमी इसमें शामिल है। राज्य की पुलिस कैसे बलात्कार के आरोपियों को बचाने और पीड़ित को जेल में डालने या पीड़ित युवती के परिवार को जेल में बंद कर पिटाई करने के आरोपों में फंसी यह अलग कहानी है। उसी पुलिस ने जांच, गिरफ्तारी और इनकाउंटर का आतंक मचा रखा है कि लोग खुल कर पूछ भले नहीं रहे हों पर मन ही मन सोच रहे होंगे कि यह कब तक चलेगा!

गुरुवार को दिल्ली में जेएनयू के छात्रों ने प्रदर्शन का ऐलान किया और सुबह से ही लुटियन की दिल्ली तक पहुंचने वाले तमाम रास्तों पर या तो ट्रैफिक बंद कर दिया गया या रास्ते बदले गए, जिससे संसद मार्ग से लेकर रायसीना रोड, फिरोजशाह रोड, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, बहादुरशाह जफर मार्ग, इंडिया गेट के एप्रोच रोड जैसी दर्जनों सड़कों पर ट्रैफिक जाम लगा रहा। लोग घंटों परेशान होते रहे। उधर जामिया के इलाके में शाहीन बाग में पिछले एक महीने से 24 घंटे का धरना चल रहा है, जिसकी वजह से कालिंदी कुंज के रास्ते नोएडा को जोड़ने वाली सड़क या तो बंद है या ट्रैफिक जाम का शिकार है।

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