एनसीपी बनाए शिव सेना नेता को सीएम!

शरद पवार को तुरंत उद्धव ठाकरे के घर जा कर बैठना चाहिए! दो टूक प्रस्ताव रखना चाहिए कि शिव सेना के साथ एनसीपी एलांयस को तैयार है और हमारे इस एलायंस को कांग्रेस बाहर से समर्थन देगी। खुद उद्धव ठाकरे या उनका बेटा मुख्यमंत्री बने और सेना छत्रपति शिवाजी के सपनों के अनुसार महाराष्ट्र को बनाए!

क्या इससे शरद पवार की पार्टी एनसीपी का धर्म भ्रष्ट नहीं होगा? कतई नहीं। और न ही इस पर कांग्रेस या सोनिया गांधी को आपत्ति होनी चाहिए। इसलिए कि नरेंद्र मोदी-अमित शाह ने महाराष्ट्र में ही कांग्रेस-एनसीपी के लोगों को तोड़ कर भ्रष्ट राजनीति की है तो जैसे को तैसा जवाब क्यों नहीं? प्रदेश में भाजपा का मॉडल कांग्रेस-एनसीपी को खा कर अपना आधार बढ़ाना है और धीरे-धीरे शिव सेना को खत्म कराना है तो शिव सेना को ले कर शरद पवार क्यों न बदले की राजनीति करे?

मैं ऐसा प्रयोग देश हित में मानता हूं। इसलिए कि एनसीपी, कांग्रेस और बाकी विरोधी पार्टियों को हिंदू राजनीति की तासीर को समझते हुए अपने आपको हिंदुओं के बीच पैठाना है तो शिव सेना जैसी हिंदू पार्टी के साथ सत्ता साझा बहुत बड़ा मैसेज बनवाने वाला काम होगा। शिव सेना-एनसीपी एलायंस को कांग्रेस बाहर से समर्थन देगी तो उसका सेकुलर चरित्र भ्रष्ट नहीं होगा, बल्कि महाराष्ट्र के मुसलमान हों या देश के मुसलमान, दलित और तमाम तरह के मोदी-शाह विरोधी खुश होंगे कि देश के सबसे अहम प्रांत में शरद पवार, सोनिया गांधी ने भाजपा को पंक्चर किया। कल तक अमित शाह यदि दलबदल से, जैसे भी हो सत्ता पाने को यदि चाणक्य नीति माने हुए थे तो शरद पवार क्यों न वैसे ही चाणक्य बनें!

बहुत संभव है इन पंक्तियों के पढ़ने तक मोदी-शाह उद्धव ठाकरे के आगे सरेंडर हो गए हों। क्योंकि इनके लिए महाराष्ट्र की सत्ता पहली प्राथमिकता है। बावजूद इसके हककीत रहेगी कि प्रदेश की पांच साल की सत्ता से भाजपा नेताओं का जो अहंकार बना है उसमें शिव सेना का दबदबा सहजता से स्वीकार्य नहीं होगा। आज नहीं तो छह महीने बाद तनाव बनेगा। तभी शरद पवार यदि अभी पेशकश कर देते हैं और कांग्रेस का समर्थन हो जाता है तो शिव सेना निश्चित ही भाजपा पर हावी रहेगी।

अपनी जगह हकीकत है कि पिछले पांच सालों में मोदी सरकार की रीति-नीति के खिलाफ उद्धव ठाकरे सर्वाधिक मुखर रहे हैं। शरद पवार और सोनिया गांधी से भी ज्यादा। दूसरी बात शिव सेना के विरोधी होते हुए भी शरद पवार ने बाल ठाकरे, उद्धव ठाकरे के साथ जिस गरिमामय अंदाज में सहज रिश्ते रखे वैसे मोदी-शाह-फड़नवीस ने अपने अहंकार में उद्धव ठाकरे व शिव सेना से नहीं रखे। तभी गठबंधन धर्म के तकाजे के बावजूद नैसर्गिक सत्ता शेयर शिव सेना और एनसीपी का बनता है। और यह शिव सैनिक भी समझ रहे होंगे कि महाराष्ट्र के बड़े वर्ग ने इन चुनावों में शरद पवार को ईडी के नोटिस का बदला मोदी सरकार से लिया है!

हां, दो विधानसभा चुनावों का सबसे बड़ा मैसेज है कि सीबीआई-ईडी की कार्रवाई, संस्थाओं के मनमाने उपयोग पर जनता ने बताया है कि मोदी सरकार, भाजपा कुछ भी प्रचार करें, लोग उलटे हुड्डा और शरद पवार के खिलाफ कार्रवाई या विपक्ष को भ्रष्ट मानने के बजाय चौटाला को भी अच्छा मानने लगे हैं तो हुड्डा को भी। अब कांग्रेस-एनसीपी-चौटाला पार्टी के पुराने पापों को अहंकार का मौजूदा राक्षस ज्यादा जनता में हावी है। सो, शरद पवार और उद्धव ठाकरे आज महाराष्ट्र की जनभावनाओं में अच्छे होने, भाजपा की अहंकारी सत्ता के मारे हुए होने की सद्भावना लिए हुए हैं। तभी इनका एलायंस न केवल अधिक टिकाऊ और सहज होगा, बल्कि प्रदेश में सरल, सहज राजनीतिक, सामाजिक सौहार्द बनवाने वाला भी होगा।

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