बड़ी बातें तो भाजपा के नेता कह रहे हैं!

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने संसद में कहा कि सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की दर गिर कर पांच फीसदी हो गई है, यह कोई बड़ी बात नहीं है। सो, सवाल है कि बड़ी बात क्या है? बड़ी बात वह है, जो भाजपा के सांसद और केंद्रीय मंत्री कह रहे हैं। ऐसा लग रह है कि सरकार के मंत्रियों और सांसदों में बड़ी बात कहने की होड़ मची है। भले अपनी बड़ी बातों से वे मजाक का विषय बन रहे हैं पर वे कह जरूर रहे हैं।

जैसे भाजपा के सांसद और किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि अगर देश में वाहन उद्योग में मंदी है तो सड़कों पर गाड़ियों का इतना जाम कैसे लग रहा है। इस तरह की बड़ी बातें भाजपा के दूसरे नेता कह रहे थे तभी वीरेंद्र सिंह को भी लगा कि वे क्यों पीछे रहें। उनसे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मिसाल देते हुए कहा था कि एक दिन तीन हिंदी फिल्में रिलीज हुईं और तीनों ने एक सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार किया। सो, कहां है आर्थिक मंदी। उन्हीं की तर्ज पर किसी ने कहा है कि कितना आईफोन बिक गए और कितनी मर्सिडीज गाड़ियां बिक गई हैं। इसलिए जो मंदी की बात कर रहे हैं वे असल में देशद्रोही हैं और सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं।

तभी भाजपा के एक नेता ने इससे भी बड़ी बात कहने का फैसला किया। झारखंड के सांसद निशिकांत दूबे ने कहा कि 1934 से पहले तो जीडीपी ही नहीं होती थी। उन्होंने कहा कि जीडीपी को इतना महत्व देने की जरूरत ही नहीं है। सही हो, जो चीज लगातार गिरती जाए वह चीज क्यों महत्व की हो सकती है। उन्होंने बड़ी बात कही और जब लोगों ने सोशल मीडिया में इसका मजाक बनाना शुरू किया तो उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने के कानून बनाने चाहिए। अच्छा हुआ जो उन्होंने पाबंदी लगाने की बात कही नहीं तो इतनी बड़ी बात कहने वाला नेता तो अपना मजाक उड़ाने वालों को फांसी देने की भी बात कर सकता था।

उन्होंने अपनी बात साबित करने के लिए किसी आर्थिक जानकार की मिसाल दी और कहा कि जीडीपी कोई बाइबल, रामायण, महाभारत नहीं है, जिसे इतना महत्व दिया जाए। सो, लोगों ने उनको याद दिलाया कि 70 साल पहले संविधान भी नहीं था। अभी संसद में संविधान की 70वीं सालगिरह मनाई गई है तो क्या उसके बारे में भी कहा जा सकता है कि इसे ज्यादा महत्व देने की जरूरत नहीं है, वह कोई गीता, रामायण या कुरान नहीं है?

संसद में प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा हुई तो भाजपा नेताओं का अद्भुत ज्ञान देखने को मिला। केंद्र सरकार के एक मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि प्याज खाने से कैंसर की बीमारी होती है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बातों का समर्थन करने के क्रम में यह बात कही। इससे पहले निर्मला ने कहा था कि उनका परिवार प्याज, लहसुन नहीं खाता है और वे भी इतना नहीं खाती हैं। इसे आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि उन्होंने कभी प्याज का स्वाद चखा ही नहीं तो वे कीमत क्या जानेंगे। सोचें, सारे देश में प्याज की कीमतों को लेकर हाहाकार मचा है और केंद्रीय मंत्री को उसकी कीमत सिर्फ इसलिए नहीं पता है कि वे प्याज नहीं खाते। यह पता नहीं बड़ी बात है या नहीं!

भोपाल से भाजपा की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने भी बहुत बड़ी बात कही थी। उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया। चुनाव लड़ते समय अप्रैल-मई में जब उन्होंने यह बात कही तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वे प्रज्ञा को दिल से कभी माफ नहीं कर पाएंगे। हालांकि बाद में उनको रक्षा मामलों की सलाहकार समिति का सदस्य बनाया गया। जब उन्होंने दूसरी बार गोडसे को देशभक्त कहा तो उनको इस सलाहकार समिति से हटा दिया गया और कहा गया कि वे शीतकालीन सत्र में होने वाली भाजपा संसदीय दल की बैठकों में नहीं शामिल होंगे। इतनी बड़ी कार्रवाई लगता है कि बड़ी बात है। वे भाजपा में हैं और माननीय सांसद हैं।

भाजपा के और भी नेता ऐसी बड़ी बड़ी बातें कह रहे हैं। जैसे उत्तर प्रदेश के एक मंत्री ने बलात्कार पीड़ित युवती को जिंदा जला दिए जाने की घटना पर कहा कि ऐसी घटनाओं को तो भगवान राम भी नहीं रोक सकते हैं।

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