बड़ी बात वही जो सबसे पहले हो!

पिछले पांच सालों में दो तरह के नैरेटिव चले है। पहला यह कि अमुक काम सबसे पहले हमने किया और दूसरा, अमुक काम पहले भी होता रहा है। जो काम हमने सबसे पहले किया वह बहुत बड़ा काम है और जो काम पहले भी होता रहा है वह कोई बात नहीं है। जैसे सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की दर गिर गई तो केंद्र सरकार के एक मंत्री ने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है पहले भी ऐसा होता रहा है। प्याज महंगा हो गया तो वह भी कोई बड़ी बात नहीं है पहले भी महंगाई रही है। बलात्कार हो रहे हैं, पीड़िताओं को जिंदा जलाया जा रहा है, आरोपी अस्पतालों में मजे ले रहे हैं तो कोई बात नहीं है, यह सब पहले भी होता था। इसलिए यह सब कोई बड़ी बात नहीं है।

असली बड़ी बात वह है, जो इस सरकार ने या इसके मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार किया। वे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो संसद की देहरी पर माथा टेक पर संसद में घुसे। यह बड़ी बात हुई। इससे पहले किसी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया था। वे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने सीमा पर जवानों के साथ दिवाली और होली मनाई, ऐसे भी किसी ने पहले नहीं किया था। उन्होंने कई ऐसे देशों की यात्रा की, जहां पहले कोई प्रधानमंत्री नहीं गया या पिछले 30-40 साल से कोई प्रधानमंत्री नहीं गया था। वे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनके कार्यकाल में अमेरिका का राष्ट्रपति भारत में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बना। इससे पहले कभी अमेरिकी राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल नहीं हुआ था। यह असली बड़ी बात है।

इस देश में असल में बड़ी बात वह होती है, जिसे मीडिया बड़ा बना कर दिखाए। इस बात को नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिए उन्होंने सबसे पहले मीडिया को इसके लिए तैयार किया कि वे जो भी कहें, मीडिया उसे बड़ा बना कर दिखाए। जैसे मीडिया ने अमेरिका के ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम को दिखाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मोदी के इस कार्यक्रम में शामिल हुए और कोई दस दिन तक भारतीय मीडिया यह दिखाता रहा कि यह भूतो न भविष्यति किस्म की परिघटना है। भारतीय मीडिया के हिसाब से यह पूरी दुनिया का कूटनीतिक परिदृश्य बदल देने वाली घटना थी। पर अफसोस की बात है कि पूरी दुनिया छोड़ें, भारत और अमेरिका के संबंधों में भी इससे रत्ती भर सुधार नहीं हुआ।

इसी तरह से मीडिया ने पिछले पांच साल में पहली बार होने और बहुत बड़ा काम होने का नैरेटिव कई बार बनाया। विदेशी नेताओं के साथ रोड शो, स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जैसे अनेक मौके आए जब मीडिया ने बताया कि इससे बड़ा कुछ भारत में आज तक नहीं हुआ है। पर देश की अर्थव्यवस्था को रसातल में ले जाने वाले फैसले, मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएं, सरकार और एजेंसियों की विफलता जैसी बातों के लिए सिर्फ इतना कहा जा रहा है कि ऐसा पहले भी होता रहा है। भाजपा के नेता और सरकार के मंत्री यहीं कह रहे हैं और मीडिया भी यहीं दिखा रहा है।

मीडिया ने सवाल उठाने की बजाय इस बात को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया कि 23 नवंबर को तड़के बिना किसी की जानकारी में राज्यपाल ने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को शपथ दिलाई। उससे पहले आधी रात को राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश भेजी, उसी रात में प्रधानमंत्री ने उसे स्वीकार किया और राष्ट्रपति को अपनी अनुशंसा भेजी और राष्ट्रपति ने एकदम तड़के इसे मंजूर करके मिसाल कायम की। ऐसा इस देश में कभी नहीं हुआ था इसलिए यह बड़ी घटना थी। अधकचरे जीएसटी को लागू करने के लिए आधी रात को संसद का सत्र बुलाया गया था। एक बार आधी रात को सीबीआई के मुख्यालय पर छापा मार कर दफ्तर सील किया गया था और सीबीआई निदेशक को हटा कर रात को दो बजे कार्यकारी निदेशक बनाया गया था। वह भी एक बड़ा काम हुआ था।

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