बदले की राजनीति अब बंद हो जाएगी!

महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों के नतीजों में एक खास बात नोटिस करने की है। पिछले कुछ दिनों में जितने नेताओं के खिलाफ केंद्र या राज्य सरकार की एजेंसियों ने कोई कार्रवाई की उन सबका प्रदर्शन अच्छा रहा। महाराष्ट्र में एनसीपी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया तो हरियाणा में भूपेंदर सिंह हुड्डा की कमान में कांग्रेस ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया। यहां तक कि बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी ने विधानसभा के उपचुनाव में दो सीटें जीत लीं। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की कमान में कांग्रेस अपनी एक सीट बढ़ाने में कामयाब रही। ध्यान रहे इन सारे नेताओं के खिलाफ पिछले कुछ दिनों में कोई न कोई कार्रवाई हुई है।

शरद पवार के राजनीतिक करियर में यह पहली बार हुआ कि उनको प्रवर्तन निदेशालय, ईडी की ओर से नोटिस दिया गया। उनका नाम महाराष्ट्र सहकारी बैंक घोटाले में शामिल किया गया। उनके भतीजे अजित पवार और पार्टी के दूसरे नेताओं के खिलाफ तो पहले से कार्रवाई चल रही थी। उनके सबसे करीबी प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ कई नए मामले शुरू हो गए। पर कुछ दिन पहले खुद पवार को भी लपेटे में लिया गया। जब उनको नोटिस मिली तो उन्होंने ईडी के दफ्तर तक जाने का फैसला किया। इससे पूरे मुंबई में हलचल मची और मुंबई पुलिस कमिश्नर के अनुरोध पर पवार ने ईडी के दफ्तर तक मार्च का अपना कार्यक्रम स्थगित किया। इस नोटिस ने पवार को ज्यादा आक्रामक बनाया। उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर खुल कर हमले किए। नतीजों से पता चलता है कि उनके खिलाफ कार्रवाई काम नहीं आई। वे पिछली बार की 41 के मुकाबले अपनी पार्टी को 54 सीट जिताने में कामयाब रहे।

यहीं स्थिति हरियाणा में भूपेंदर सिंह हुड्डा के साथ हुई थी। हुड्डा के ऊपर मानेसर जमीन घोटाले, पंचकूली भूखंड आवंटन, एजेएल को जमीन आवंटन जैसे कई मुद्दों में उलझाया गया है। कई केंद्रीय व राज्य सरकार की एजेंसियां उनकी जांच कर रही हैं। कई बार उनके और उनके करीबियों के यहां छापे मारे जा चुके हैं। एक तरफ हुड्डा एजेंसियों के निशाने पर हैं तो दूसरी ओर जेल में बंद ओमप्रकाश चौटाला को लगातार पैरोल मिलती रही और इस दौरान उनको खुल कर चुनाव प्रचार भी करने दिया गया। नतीजा क्या हुआ? हुड्डा कांग्रेस को 31 सीट जिताने में कामयाब रहे, जबकि चौटाला की पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई।

इसी तरह कमलनाथ के करीबियों के यहां छापे पड़े और उनके भांजे को पकड़ कर जेल में डाला गया है। उधर बिहार में लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं और लालू प्रसाद खुद जेल में बंद हैं। पर मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा की जीती झाबुआ सीट उससे छीन ली तो बिहार में राजद ने जदयू की जीती दो सीटों पर जीत हासिल की। सो, उम्मीद करनी चाहिए कि भाजपा और उसकी सरकारें इस बात को संज्ञान में लेंगी। हो सकता है कि जिनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है उन्होंने सचमुच गड़बड़ी की हो पर जिस अंदाज में उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है, उससे लोगों में यह मैसेज जा रहा है कि कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है और विरोधियों को परेशान किया जा रहा है। तभी उनको आम लोगों से सहानुभूति मिल रही है।

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