सेकुलर नेताओं का ढोंग

देश के सेकुलर नेताओं ने कमाल का ढोंग किया। महाराष्ट्र में शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने की बधाई सारे सेकुलर नेता दे रहे हैं। सब इसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह ब्रांड की राजनीति की हार बता रहे हैं और इसमें अपने लिए अवसर देख रहे हैं। सब शरद पवार की जोड़ तोड़ की राजनीति और शिव सेना के उद्धव ठाकरे की हिम्मत की दाद दे रहे हैं। पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने कोई नही गया। उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने दिल्ली आकर सोनिया और राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निमंत्रण दिया पर इन तीनों में से कोई भी शपथ समारोह में हिस्सा लेने नहीं गया।

यह गुड़ खाकर गुलगुले से परहेज करने जैसा है। हैरानी है कि कांग्रेस के नेताओं ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी कोई सबक नहीं लिया। मोदी और शाह ने अपनी विचारधारा और पुरानी तमाम बातों को ताक पर रख कर जम्मू कश्मीर में पहले मुफ्ती मोहम्मद सईद और उनके निधन के बाद मेहबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री बनाया था। मोदी और शाह दोनों मुफ्ती पिता-पुत्री के साथ खड़े रहे थे। तो क्या उनको देश के हिंदुओं ने वोट नहीं दिया? तथ्य है कि कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के बाद भाजपा पूरे देश में जीती। 2015 में वहां सरकार बनाने के बाद वह बिहार छोड़ कर बाकी सभी राज्यों में जीतती रही थी। उसकी जीत का यह सिलसिला नवंबर 2018 तक चला। और फिर लोकसभा में भी उसने पहले से ज्यादा बड़ी जीत दर्ज की।

मोदी और शाह ने कश्मीर में जो किया वह डंके की चोट पर किया और अपने मतदाताओं को समझाया कि उन्होंने यह एक रणनीति के तहत किया है और उनकी लंबे समय की राजनीति के लिए यह जरूरी था। कांग्रेस की बारी बारी से सरकार बनने का सिलसिला तोड़ने के लिए जरूरी था भाजपा का सरकार बनाना। उसने स्थापित किया कि देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य में भाजपा की सरकार बनाना उसकी रणनीति का हिस्सा है। इसके उलट कांग्रेस ऐसा मैसेज जाने दे रही है कि उसने मजबूरी में महाराष्ट्र में सरकार बनाई। वह ऐसे आचरण कर रही है, जैसे उसने कोई गलत काम किया है। उसने सरकार बना तो दी पर वह इसका रणनीतिक फायदा उठाने से चूक रही है। यहीं काम दूसरी सेकुलर पार्टियां कर रही हैं।

दो लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद भी वे इस भ्रम से नहीं निकले हैं कि मुस्लिम एक बड़ा वोट बैंक और चुनाव जीतने के लिए उसकी जरूरत है। वे 80 करोड़ हिंदू वोट के मुकाबले अब भी दस करोड़ अल्पसंख्यक वोट की मृग मरीचिका में उलझे हैं। इसका मतलब है कि उनको अपनी विचारधारा और मुस्लिम वोट के मनोविज्ञान पर कोई भरोसा नहीं है। जैसे भाजपा को भरोसा है कि हिंदू उसको वोट देगा वैसे लग रहा है कि कांग्रेस या दूसरी सेकुलर पार्टियों को यह भरोसा नहीं है कि मुस्लिम उसको वोट देगा। तभी वे इस किस्म का ढोंग कर रहे हैं।

इसका कारण भी ये सेकुलर पार्टियां ही हैं। उन्होंने अपने आचरण से भाजपा को हिंदुओं की एकमात्र पार्टी के रूप में स्थापित होने दिया है। महाराष्ट्र के आधे अधूरे दांव से यह बात और मजबूती से स्थापित होगी। दूसरी ओर मुस्लिम वोट के दावेदारों में एक दर्जन पार्टियां हैं। अखिलेश यादव को लग रहा है कि अगर शिव सेना के साथ दिखे तो मुस्लिम मायावती के साथ चला जाएगा। ममता बनर्जी को लग रहा है कि उद्धव के शपथ में गए तो मुस्लिम लेफ्ट या कांग्रेस के साथ चला जाएगा। नीतीश कुमार को लग रहा है कि शिव सेना की सरकार की शपथ में गए तो मुस्लिम राजद के साथ चला जाएगा। इसका मतलब है कि देश में मुस्लिम वोट की दावेदार पार्टियों की संख्या अनगिनत है और हिंदू वोट की दावेदार पार्टी एक ही है- भाजपा।

मुंबई के शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे के शपथ समारोह में नहीं जाकर सोनिया व राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मनमोहन सिंह, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार ने जो ढोंग किया है वह हिंदू मानस को प्रभावित करेगा और इसका फायदा भाजपा को होगा। इनके इस ढोंग से यह मैसेज गया है कि उन्होंने हिंदुओं की एकमात्र पार्टी भाजपा को सरकार बनाने से रोक तो दिया है पर उनको अब भी मुस्लिम वोट की चिंता है। उन्हें हिंदू वोट की परवाह नहीं है। इस राजनीति से इन सेकुलर पार्टियों ने शिव सेना का भी नुकसान किया है। एक झटके में शिव सेना की हिंदू विरासत के सहारे इन पार्टियों को भाजपा के वोट को छिन्न भिन्न करना था तो उलटे अपने ढोंग से उन्होंने इस वोट को मजबूत कर दिया। शिव सेना को रोकने के लिए भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस के एनसीपी के अजित पवार को साथ लेकर आधी रात की सरकार बनाने से हिंदुओं के मन में भाजपा के प्रति जो नाराजगी पैदा हुई थी उसे इन सेकुलर नेताओं के ढोंग ने खत्म कर दिया है।

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