अयोध्या पर सुनवाई पूरी, फैसले का इंतजार

नई दिल्ली। अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने बुधवार को सुनवाई पूरी की। अब फैसले का इंतजार शुरू हो गया है। 17 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायर होने से पहले फैसला आने की संभावना है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर 2010 में दिए फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर संविधान पीठ ने छह अगस्त को सुनवाई शुरू की थी और 40 दिन तक सभी पक्षों की दलीलें सुनी गईं।

संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए संबंधित पक्षों को ‘राहत में बदलाव’ यानी ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। बुधवार को 40वें दिन की सुनवाई में कई नाटकीय घटनाक्रम भी हुआ। हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने एक नक्शा पेश किया तो मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने उसे फाड़ दिया। इस पर अदालत ने नाराजगी भी जाहिर की।

पहले इस मामले में सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी की जानी थी। लेकिन 14 अक्टूबर को सुनवाई शुरू होने पर अदालत ने कहा कि यह 17 अक्ट्रबर तक पूरी की जाएगी लेकिन 15 अक्टूबर को पीठ ने यह समय सीमा घटा कर 16 अक्टूबर कर दी थी। इस मामले में बुधवार की सुबह सुनवाई शुरू होने पर पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए किसी भी पक्षकार को आज यानी बुधवार के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा।

सर्वोच्च अदालत ने पहले इस विवाद को मध्यस्थता के जरिए आम राय से हल करने का प्रयास प्रयास किया था। अदालत ने रिटायर जज जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति भी बनाई थी लेकिन उसे इसमें सफलता नहीं मिली। बहरहाल, संविधान पीठ ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर इस 40 दिन में विस्तार से सुनवाई की।

बुधवार को आखिरी दिन की सुनवाई में एक हिंदू पक्षकार की ओर से दलील दी गई कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह साबित करने में विफल रहे हैं कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल पर मुगल बादशाह बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने पांच अगस्त 1992 की स्थिति में मस्जिद उन्हें सौंपने की मांग की है।

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