कृषि सुधार 21वीं सदी की जरूरत: मोदी

नई दिल्ली। संसद से पास कृषि विधेयकों के देश भर में हो रहे विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें ऐतिहासिक बताया है और साथ ही कहा है कि कृषि सुधार 21वीं सदी की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों से देश के किसानों का भविष्य उज्ज्वल होगा। प्रधानमंत्री ने सोमवार को लगातार तीसरे दिन देश के किसानों को भरोसा दिलाया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि कृषि मंडियां समाप्त नहीं होंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए चुनावी राज्य बिहार में 14,258 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाली नौ राजमार्ग परियोजनाओं और राज्य के सभी 45 हजार 945 गांवों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं का उद्घाटन किया। इसके बाद अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह किसानों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी सरकार के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

मोदी ने कृषि विधेयकों के पास होने का जिक्र करते हुए सोमवार को कहा- कल देश की संसद ने किसानों को अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है। इसके लिए मैं देश के किसानों को और भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए आशावादी लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई देता हूं। यह सुधार 21 वी सदी के भारत की जरूरत है।  उन्होंने कहा कि देश में अब तक उपज और बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून हैं, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे। इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हुए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए कृषि सुधारों ने देश के हर किसान को आजादी दी है कि वह किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल, अपनी फल व सब्जियां, अपनी शर्तों पर बेच सकता है। अब उसे अपने क्षेत्र की मंडी के अलावा भी कई और विकल्प मिल गए हैं। अब उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा तो वह मंडी में अपनी फसल बेचेगा, मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिलता है तो वहां जाकर बेचेगा।

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