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अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबल

नई दिल्ली। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अभिजीत बनर्जी को इस साल के अर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कार के लिए चुना गया है। 21 साल बाद किसी भारतीय को यह पुरस्कार मिलेगा। इससे पहले अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र के नोबल के लिए चुना गया था। बहरहाल, वर्ष 2019 का अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार अभिजीत बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया गया है।

यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के लिए किए गए उनके कामों के लिए दिया गया है। नोबेल समिति के सोमवार को जारी एक बयान में तीनों को 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई। बयान के मुताबिक- इस साल के पुरस्कार विजेताओं का शोध वैश्विक स्तर पर गरीबी से लड़ने में हमारी क्षमता को बेहतर बनाता है। महज दो दशक में उनके नए प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण ने विकास अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। विकास अर्थशास्त्र मौजूदा समय में शोध का एक प्रमुख क्षेत्र है। पश्चिम बंगाल में जन्मे अभिजीत बनर्जी 58 साल के हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय और दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई की। इसके बाद 1988 में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि हासिल की। फिलहाल वे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमआईटी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन अंतरराष्ट्रीय प्रोफेसर हैं।

बनर्जी ने वर्ष 2003 में डुफ्लो और सेंडिल मुल्लाइनाथन के साथ मिल कर अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी एक्शन लैब, जे-पाल की स्थापना की। वह प्रयोगशाला के निदेशकों में से एक हैं। बनर्जी संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2015 के बाद के विकासत्मक एजेंडा पर विद्वान व्यक्तियों की उच्च स्तरीय समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।गौरतलब है कि अभिजीत बनर्जी की पत्नी एस्थर डुफ्लो फ्रांसीसी नागरिक हैं। नोबल पुरस्कार के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभिजीत बनर्जी को बधाई दी। उन्होंने अपने ट्विटर अकांउट पर लिखा- अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार जीतने के लिए साउथ प्वाइंट स्कूल एंड प्रेसिडेंसी कॉलेज कोलकाता के पूर्व छात्र अभिजीत बनर्जी को हार्दिक बधाई। एक और बंगाली ने देश को गौरवान्वित किया है। हम बहुत खुश हैं।

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