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महाराष्ट्र के बाद झारखंड भी निकला भाजपा के हाथ से

नई दिल्ली। इस वर्ष लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ केन्द्र में दोबारा सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी के हाथ से महाराष्ट्र के बाद झारखंड भी निकल गया है । गत मई में हुये लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त प्रदर्शन करने वाली भाजपा उसके बाद हुये विधानसभा चुनावों में अपना प्रदर्शन दोहराने में विफल रही है।

गत वर्ष के अंत में तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव से भाजपा की हार का जो सिलिसला शुरु हुआ था वह बढ़ता ही जा रहा है। इस वर्ष झारखंड सहित तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव हुये है जिनमें भाजपा अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफल रही है। लोकसभा चुनाव के बाद पिछले अक्टूबर में हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटों की संख्या पिछले बार के मुकाबले कम रही।

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वह हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी से हाथ मिलाकर सरकार बनाने में तो सफल रही लेकिन महाराष्ट्र जैसा बड़ा राज्य उसके हाथ से निकल गया। अब उसे झारखंड में करारी हार का सामना करना पड़ा है। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा , कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन के हाथों उसे हार का सामना करना पड़ा है। पिछले चुनाव में 37 सीटें जीत कर सबसे बड़े दल के रुप में उभरी भाजपा इस बार बहुत पिछड़ गयी। उसके कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। लोकसभा चुनाव में करीब 50 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली भाजपा ने इस चुनाव में अकेले उतरी थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा के शीर्ष नेताओं के धुआंधार प्रचार के बावजूद वह अपना प्रदर्शन दोहरा नहीं पायी। पिछले चुनाव में उसे 37 सीटें मिली थी। पिछले चुनाव में उसका आल झारखंड स्टूडेंट यूनियन के साथ गठबंधन था जो लेकिन इस बार कायम नहीं रह सका। पिछले चुनाव में झामुमो को 19 सीटें मिली थी लेकिन इस बार वह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है तथा अपने सहयोगी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में आ गयी है। इस चुनाव में कांग्रेस भी अपनी सीटों में बढ़ोत्तरी करने में सफल रही है।

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भाजपा और शिवसेना ने मिलकर लड़ा था और उनके गठबंधन को स्पष्ट बहुमत भी मिल गया था लेकिन मुख्यमंत्री पद ढाई ढाई वर्ष की शिवसेना की मांग नहीं मानने पर उसने भाजपा से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना ली। महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में भाजपा 105 सीट ही जीत पायी थी और उसका शिवसेना से मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद हो गया था इसके बावजूद श्री देवेन्द्र फडनवीस दोबारा मुख्यमंत्री बन गये थे । इसके खिलाफ शिवसेना , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस एकजुट हो गयी और उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था ।

बाद में श्री फडनवीस ने इस्तीफा दे दिया और श्री उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे थे । हरियाणा में हुये विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन उसकी अपेक्षा से काफी खराब रहा। नब्बे सदस्यीय विधानसभा में वह 40 सीटें ही जीत पायी जो बहुमत के आंकड़े से छह कम थी। वह हरियाणा को किसी प्रकार से बचाने में सफल रही तथा मनोहर लाल खट्टर दोबारा मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे । विधानसभा चुनावों में हार के चलते भाजपा अब देश के 35 प्रतिशत हिस्से में सिमट गयी जबकि 2017 में देश के 70 प्रतिशत हिस्से पर उसका कब्जा था।

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