किसानों को 24 घंटे का अल्टीमेटम!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों को तेवर दिखाया है। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ 11 दौर की वार्ता के बाद शुक्रवार को सरकार ने दो टूक अंदाज में कह दिया कि वह अब किसानों से बात नहीं करेगी। शुक्रवार को हुई वार्ता में सरकार और किसानों के बीच जबरदस्त तल्खी दिखी और उसके बाद बातचीत बंद किए जाने का ऐलान हो गया। सरकार ने किसानों से कहा कि वह उनको कई प्रस्ताव दे चुकी है और अब किसानों को जवाब देना है। केंद्र सरकार ने किसानों को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया है।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार की बैठक में किसानों ने केंद्र सरकार की ओर से तीनों कानूनों पर डेढ़ साल तक रोक लगाने के प्रस्ताव को नामंजूर करने की सूचना दी। इसके बाद जब वार्ता शुरू हुई तो कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के सामने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर एक कमेटी बनाने का सुझाव दिया, जिसे किसानों ने मौके पर ही खारिज कर दिया। इसके बाद वार्ता में गतिरोध पैदा हो गया। वार्ता बंद कर दी गई और आगे के लिए कोई नई तारीख  भी तय नहीं की गई है।

बैठक के बाद शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- हमने कई राउंड की बैठकें कीं। जब यूनियन कानून वापसी पर अड़ी रही तो हमने उन्हें कई विकल्प दिए। आज भी हमने उन्हें कहा है कि सभी विकल्पों पर चर्चा करके आप अपना फैसला हमें कल बताइए। तोमर ने आगे कहा- इतने दौर की बातचीत के बाद भी नतीजा नहीं निकला, इसका हमें खेद है। फैसला न हो सकने का मतलब है कि कोई न कोई ताकत है, जो इस आंदोलन को बनाए रखना चाहती है और अपने हित के लिए किसानों का इस्तेमाल करना चाहती है। ऐसे में किसानों की मांगों पर फैसला नहीं हो पाएगा।

तोमर ने किसानों से कहा कि सरकार अपनी ओर से भरपूर प्रयास कर चुकी है और अब गेंद किसानों के पाल में है। बहरहाल, शुक्रवार की वार्ता में गतिरोध पैदा होने और वार्ता बंद होने के बाद आंदोलन तेज हो सकता है। किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने की तैयारियों में लगे हैं और अभी तक पुलिस ने इसकी मंजूरी नहीं दी है। शुक्रवार की बैठक के बाद दिए गए तोमर के बयानों से लग रहा है कि सरकार किसान आंदोलन को बाहरी ताकतों का आंदोलन बता कर सख्ती की तैयारी कर रही है।

किसानों के भी तेवर सख्त

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। शुक्रवार को हुई बैठक में समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही थी कि लेकिन शुक्रवार को वार्ता टूट गई और आगे की कोई तारीख तय नहीं की गई है। किसानों ने सरकार के ऊपर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया है। शुक्रवार की वार्ता में सरकार ने किसानों से तेवर दिखाते हुए कहा है कि वह अब बात नहीं करेगी। इसके बाद किसानों ने भी अपने तेवर सख्त कर लिए और कहा कि आंदोलन तेज होगा। किसानों ने कहा है कि सरकार भले बातचीत बंद कर दे, लेकिन वे पीछे नहीं हटेंगे।

शुक्रवार को केंद्र सरकार के मंत्रियों और किसान संगठनों के बीच कहने को पांच घंटे तक वार्ता चली लेकिन आमने-सामने आधे घंटे भी बात नहीं हुई। किसानों के वार्ता में बैठ जाने के साढ़े तीन घंटे बाद कृषि मंत्री वार्ता में पहुंचे। उनके साथ करीब आधे घंटे की मीटिंग में ही तय हो गया कि अब आगे बात नहीं होगी। किसानों और मंत्रियों में तल्खी देखने को मिली। मजदूर संघर्ष समिति के एसएस पंढेर ने मीटिंग के बदा कहा- कृषि मंत्री ने हमें साढ़े तीन घंटे इंतजार कराया। यह हमारा अपमान है। इसके बाद जब वे आए तो बोले कि सरकार की बात मान लीजिए। अब हम मीटिंग करना बंद कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

शुक्रवार की बैठक शुरू होते ही किसान संगठनों ने सरकार से कहा कि वे कानून को डेढ़ साल तक स्थगित करके समिति के गठन के प्रस्ताव को नामंजूर करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सरकार की ओर से नाराजगी जताते हुए कहा गया कि किसान संगठनों ने बैठक से पहले ही क्यों अपने फैसले की जानकारी मीडिया के साथ साझा कर दी? सरकार ने किसान संगठनों से सरकार के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने को कहा और 24 घंटे का समय दिया, अपने फैसले की जानकारी देने के लिए।

कीर्ति किसान यूनियन के नेता राजेंद्र सिंह ने एक निजी टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा-  बैठक में कृषि मंत्री की ओर से पहली बार हमारी न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की कानूनी गारंटी की मांग पर एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन हमने सरकार को साफ शब्दों में कहा किस समिति के गठन का प्रस्ताव हमें मंजूर नहीं है क्योंकि समिति की सिफारिशें सरकार आगे चलकर मान लेगी, यह निश्चित नहीं है। किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी को तिरंगा लेकर किसान ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। साथ ही सभी राज्यों में भी ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी। ट्रैक्टर रैली का रास्ता तय करने के लिए शनिवार को पुलिस के साथ किसानों की निर्णायक बैठक होगी। पुलिस ने बाहरी रिंग रोड छोड़ कर किसानों को तीन रास्ते सुझाए हैं।

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