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संसद में विपक्ष ने दिखाए तेवर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों और किसान आंदोलन को लेकर संसद में लगातार दूसरे दिन विपक्षी सांसदों ने तीखे तेवर दिखाए। उच्च सदन में विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला किया। कांग्रेस और शिव सेना के नेताओं ने सरकार से तीखे सवाल पूछे और कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस के आनंद शर्मा ने लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के पलायन का मुद्दा भी उठाया तो शिव सेना के संजय राउत ने सरकार को इस बात के लिए कोसा कि वह आंदोलन करने वालों को देशद्रोही ठहरा रही है। बाद में चर्चा का जवाब देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी तीखा हमला किया।

सरकार पर सबसे तीखा हमला शिव सेना सांसद संजय राउत ने किया। उन्होंने पत्रकार अर्नब गोस्वामी और अबिनेत्री कंगना रनौत का मुद्दा भी उठाया। राउत ने कहा- देशप्रेमी कौन हैं हमारे देश में? अर्नब गोस्वामी, जिसकी वजह से महाराष्ट्र में एक निरपराध व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली? या कंगना रनौत देशप्रेमी हैं? अर्नब गोस्वामी के लीक हुए व्हाट्सएप चैट का हवाला ते हुए राउत ने कहा- प्रकाश जावडेकर के बारे में अर्नब ने किस भाषा का इस्तेमाल किया? आपको शर्म आनी चाहिए कि आपने उन्हें शरण दे रखी है। जिसने गोपनीयता कानून तोड़ते हुए बालाकोट स्ट्राइक के बारे में पहले ही बता दिया, वो आपकी यानी केंद्र सरकार की शरण में है, उसको आपका प्रोटेक्शन है। लेकिन अपने हक के लिए लड़ने वाला किसान देशद्रोही है!

राज्यसभा में किसानों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच करीब तीन घंटे तक जम कर बहस हुई।  बहस के दौरान कांग्रेस के आनंद शर्मा ने अपने भाषण की शुरुआत में प्रवासी मजदूरों और किसानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद देश के हालात सबको पता हैं। उन लोगों को भी, जिनके रोजगार गए, परिवार तबाह हो गए। किसानों को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर किया गया। इसकी जिम्मेदार सरकार है।

दो दिन हुई चर्चा का जवाब देते हुए कृषि मंत्री तोमर ने भी विपक्ष पर हमला किया। चर्चा के दौरान विपक्ष की टोकाटाकी से वे इतने नाराज हो गए कि उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगा दिया कि उसके राज में खून से खेती होती है। बाद में आसन पर मौजूद वंदना चव्हाण ने यह बात सदन की कार्यवाही से निकलवा दिया।

बहरहाल, चर्चा का जवाब देते हुए तोमर ने कहा- विपक्ष को धन्यवाद कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की। सरकार को कोसने में कंजूसी भी नहीं की और कृषि कानूनों को जोर देकर काला कानून बताया। मैं किसान यूनियन से दो महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है, लेकिन मुझे जवाब नहीं मिला। कृषि मंत्री ने आगे कहा- ठेके पर खेती के कानून में कोई एक प्रावधान बता दीजिए जो किसान विरोधी हो। उन्होंने पंजाब की ओर इशारा करते हुए कहा कि विवाद एक ही राज्य का मसला है। किसानों को बरगलाया गया है।

कृषि मंत्री ने कृषि कानूनों का बचाव करते हुए कहा- हम लोगों ने ट्रेड एक्ट बनाया। उसमें यह प्रावधान किया कि एपीएमसी मंडियों के बाहर जो इलाका होगा, वह ट्रेड एरिया होगा। वह किसान का घर या खेत भी हो सकता है ताकि वह कहीं से भी अपनी उपज बेच सके। उन्होंने कहा कि एपीएमसी के बाहर होने वाले ट्रेड पर राज्य या केंद्र का कोई टैक्स नहीं होगा। केंद्र सरकार का एक्ट टैक्स को खत्म करता है। कई राज्य सरकारों के कानून एपीएमसी में टैक्स देने के लिए बाध्य करते हैं।

लोकसभा सांसदों ने की शिकायत

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 72 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों से मिलने गए सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से शिकायत की है कि उनको किसानों से नहीं मिलने दिया गया। 10 पार्टियों के 15 सांसदों का यह प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को किसानों से मिलने गाजीपुर बॉर्डर पर गया था लेकिन पुलिस ने उन्हें किसानों से नहीं मिलने दिया। इस बारे में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से शिकायत की है। उन्होंने यह भी कहा है कि गाजीपुर को भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर जैसा बना दिया गया है।

लोकसभा में सांसदों ने कृषि कानूनों पर अलग से चर्चा कराने की मांग की है। इसे लेकर शुक्रवार को विपक्षी पार्टियों ने तीनों कृषि कानून वापस लेने के लिए नारेबाजी की। हंगामे के चलते दिन भर में दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले गुरुवार को भी नौ विपक्षी दलों के 12 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को चिट्ठी लिख कर कृषि कानूनों पर सदन में अलग से चर्चा की मांग रखी थी।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के किसान आंदोलन का समर्थन करने पर चल रहे विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। चौधरी ने ट्विट कर कहा- हमारे कुछ राष्ट्रवादियों ने अमेरिका में जाकर अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था। जब भारतीयों ने अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के खिलाफ प्रतिक्रिया दी थी तो किसी ने सवाल नहीं उठाया था। चौधरी ने कहा- हम एक ग्लोबल विलेज में रहते हैं, आखिर हमें किसी भी प्रकार की आलोचना से क्यों डरना चाहिए, हमें तो आत्मचिंतन करना चाहिए। हम सभी अन्नदाता के द्वारा उगाए गए अन्न से पेट भर कर बड़े हुए हैं। बेहतर होता कि हम भारतीय किसानों के साथ एकजुटता दिखाते।

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