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25 साल बाद अकाली और बसपा साथ

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। भाजपा से अलग हुई अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनावी तालमेल कर लिया है। दोनों पार्टियां 25 साल बाद साथ आईं हैं और मिल कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। चुनाव जीतने पर दलित उप मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर चुके अकाली दल को बसपा के साथ आने से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। शिरोमणी अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने शनिवार को सीटों के बंटवारे का भी ऐलान कर दिया।

बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र की मौजूदगा में प्रेस कांफ्रेंस में गठबंधन की घोषणा करते हुए अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस गठबंधन को पंजाब की राजनीति में नया सवेरा बताया। उन्होंने कहा- आज ऐतिहासिक दिन है, पंजाब की राजनीति की बड़ी घटना है। बादल ने कहा कि अकाली दल और बसपा साथ मिल कर 2022 विधानसभा चुनाव और अन्य चुनाव लड़ेंगे।

बादल ने सीटों की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से बसपा 20 पर चुनाव लड़ेगी और बाकी 97 सीटों पर अकाली दल के उम्मीदवार लड़ेंगे। बसपा माझा में पांच, दोआबा में आठ और मालवा इलाके में सात सीटों पर लड़ेगी। उसके हिस्से में जालंधर का करतारपुर साहिब, जालंधर पश्चिम, जालंधर उत्तर, फगवाड़ा, होशियारपुर सदर, दासुया, रुपनगर जिले में चमकौर साहिब, पठानकोट जिले में बस्सी पठाना, सुजानपुर, अमृतसर उत्तर और अमृतसर मध्य जैसी सीटें आई हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले 1996 में दोनों पार्टियों ने मिल कर चुनाव लड़ा था। हालांकि यह गठबंधन एक ही साल चला और 1997 में अकाली दल का तालमेल भाजपा से हो गया। भाजपा के लिए अकाली दल 23 सीटें छोड़ती थीं। पहले कहा जा रहा था कि बसपा को भी भाजपा के बराबर ही सीट मिलेगी, लेकिन बाद में बसपा 20 सीटों पर लड़ने के लिए राजी हो गई। ध्यान रहे पंजाब में सबसे ज्यादा करीब 33 फीसदी आबादी दलित है।

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