ज्यादा कर सामाजिक अन्याय की तरह : बोबड़े

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा है कि कर विवादों का जल्दी समाधान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ज्यादा कर की वसूली सामाजिक अन्याय की तरह है। उन्होंने कहा है कि अगर कर विवादों का जल्दी समाधान होता है तो यह करदाताओं के लिए बड़ी राहत होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि जल्दी समाधान से मुकदमेबाजी में फंसी रकम भी मुक्त होगी।

अगले साल का आम बजट पेश होने से ठीक पहले उन्होंने कहा- नागरिकों पर कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा- कर चोरी करना देश के बाकी नागरिकों के साथ सामाजिक अन्याय है। लेकिन अगर सरकार मनमाने तरीके से या बहुत अधिक टैक्स लगाती है तो ये भी खुद सरकार द्वारा सामाजिक अन्याय होगा। बजट से पहले चीफ जस्टिस की यह टिप्पणी बहुत अहम है।

बहरहाल, उन्होंने कर के लंबित मामलों पर चिंता जताने के साथ साथ यह भी कहा कि कर न्यायपालिका देश को चलाने में अहम भूमिका निभाती है। चीफ जस्टिस बोबड़े ने आय कर अपीलीय ट्रिब्यूनल के 79वें स्थापना दिवस पर कहा- कर विवादों का न्यायपूर्ण और जल्दी निपटारा टैक्स देने वालों के लिए प्रोत्साहन का काम करेगा। टैक्स कलेक्टर और टैक्स ज्यूडिशियरी यह निश्चित करें कि कानूनी तौर पर कर मूल्यांकन की मांग मुकदमेबाजी में ही न फंसी रहे।

सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और कस्टम एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल, सीईएसटीएटी में अप्रत्यक्ष कर से जुड़े मामलों में दो साल में करीब 61 फीसदी की कमी आई है। इसमें करीब 1.05 लाख तक की कमी आ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और सीईएसटीएटी में 30 जून 2017 को 2,73,591 ऐसे केस लंबित थे। मार्च 2019 में यह घटकर 1,05,756 रह गए।

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