शेख हसीना सरकार गिराने की साजिश का हिस्सा था पीएम नरेन्द्र मोदी की यात्रा पर हमला , 600 के विरुद्ध प्रकरण दर्ज

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ढाका | भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय यात्रा (Prime Minister Narendra Modi Bangladesh Visit 2021) के विरोध में हुए हमले को बांग्लादेश सरकार (Bangladesh Government) गंभीरता से ले रही है। करीब छह सौ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करते हुए सरकार ने यह माना था कि शेख हसीना सरकार (Shekh Hasina Government) को गिराने की यह साजिश थी।

सरकार की ओर से इस्लामिक समूहों द्वारा की गई देशव्यापी हड़ताल के बीच मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद में झड़प के मामले में मामला दर्ज करते हुए जांच प्रारंभ की है। आपको बता दें कि खुफिया एजेंसी की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (Jamat e Islami) ने बड़े पैमाने पर हमले करने के लिए भारी मात्रा में धन दिया था। ताकि भारतीय पीएम मोदी की यात्रा के दौरान शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार पर कानून—व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाकर सरकार को अस्थिर किया जा सके। पीएम मोदी 26-27 मार्च को बांग्लादेश के दौरे पर थे। बांग्लादेश खुफिया विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस, मीडिया और सरकारी प्रतिष्ठानों पर व्यापक रूप से रक्तपात और बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी की गई थी।

इस दरम्यान हुए हमलों में 50 लोग घायल हो गए थे। आतंकियों ने न सिर्फ श्रद्धालुओं को निशाना बनाया, बल्कि उनकी मोटरबाइकों में आग भी लगा दी और पुलिस पर पत्थर फेंके। रेल मार्ग बाधित कर दिए गए थे और एक ब्राह्मणबारिया स्टेशन को आग लगा दी गई थी। इसके कारण कई ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर फंसी भी रहीं। यही नहीं रविवार 28 मार्च के दौरान हुई हड़ताल में भी ढाका, सिलहट, राजशाही, चटगांव और ब्राह्मणबारिया सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हिंसा और आगजनी के समाचार मिले। ब्राह्मणबेरिया में चटगांव से चलने वाली इंटरसिटी सोनार बांग्ला एक्सप्रेस ट्रेन में भीड़ ने ईंटें फेंकी और करीब दो सौ लोग घायल हो गए। हिंसक आंदोलनकारियों ने आशूगंज और ब्राह्मणबारिया के बीच 50 साल पुराने रेलवे ब्रिज को भी फूंक दिया।

यह कहा गया है रिपोर्ट में
बांग्लादेश खुफिया महकमे की रिपोर्ट में साफ कहा गया ​है कि यदि आवश्यक हो तो कुछ गिरफ्तारियां की जाए। जमात के स्वामित्व वाली अचल संपत्ति, अस्पतालों और अन्य ईमारतों की छानबीन कर इस संगठन के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद कर देने चाहिए। रिपोर्ट बताती है कि जमात-ए-इस्लाम के लोगों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा के मद्देनजर अपने 60 प्रतिशत अनुयायियों को राजधानी ढाका में स्थानांतरित होने के लिए कहा था। इसके चलते इस्लामी छत्री संगठन, जमात की महिला विंग और इस्लामिक शैडो संगठन के सदस्यों ने ढाका में प्रवेश किया था। बाहर से आने वाले कार्यकर्ताओं को तीन समूह में बांटते हुए जमात के छात्रसंघ अध्यक्ष शिबीर सहित पहले समूह को मोदी विरोधी विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होना था।

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दूसरा समूह लेफ्ट शेड संगठन के साथ मोदी विरोधी रैली में शामिल होना था, जबकि योजना के अनुसार, तीसरा समूह हिफाजत के छह इस्लामी राजनीतिक दलों के प्रदर्शन में शामिल होना था। अन्य खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात, हिफाजत और विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी वाली प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिराने की साजिश रच रहे हैं। सिविल-सोसाइटी के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जिस तरह से ये संगठन विरोध प्रदर्शनों को अंजाम दे रहे हैं, इससे उनके मकसद का पता चलता है और वे देश की शांति और प्रगति में बाधा चाहते हैं। सरकार ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए ढाका और देश के अन्य हिस्सों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) सैनिकों को तैनात किया है।

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