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अयोध्या मामले में चार समीक्षा याचिका दायर

नई दिल्ली। अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के भूमि विवाद में आए सुप्रीम कोर्ट के नौ नवंबर के फैसले पर समीक्षा के लिए कई और याचिकाएं दायर हो गई हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद ने पहली याचिका दायर की थी। उसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन से चार याचिकाएं और दायर की गई हैं। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सन 1992 में मस्जिद ढहाए जाने को मंजूरी देने जैसा है और अवैध रूप से रखी गई मूर्ति के पक्ष में फैसला सुनाया गया है।

पुनर्विचार याचिकाओं में कहा गया है कि हिंदुओं का कभी वहां पूरा कब्ज़ा नहीं था। यह भी कहा गया है कि मुसलमानों को पांच एकड़ जमीन देने का फैसला पूरा इंसाफ नहीं कहा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह अपने नौ नवंबर के फैसले पर रोक लगाए और मामले पर दोबारा विचार करे। सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन से मिसबाहुद्दीन, मौलाना हसबुल्ला, हाजी महबूब और रिजवान अहमद ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं। अगर खुली अदालत में इन पर सुनवाई हुई तो इन सभी याचिकाओं के वकील राजीव धवन होंगे।

याचिकाओं में कहा गया है कि ये याचिकाएं शांति और सद्भाव में खलल डालने के लिए नहीं, बल्कि न्याय हासिल करने के लिए दाखिल की गई हैं। मुस्लिम संपत्ति हमेशा ही हिंसा और अनुचित व्यवहार का शिकार हुई है। फैसले में 1992 में मस्जिद के ढहाए जाने का फायदा दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अवैध रूप से रखी गई मूर्ति कानूनी रूप से वैध नहीं हो सकती और इसके पक्ष में फैसला सुनाया गया है। गौरतलब है कि नौ नवंबर के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर हिंदू पक्ष का अधिकार माना और मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।

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