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आज किसानों का भारत बंद

नई दिल्ली। कृषि से जुड़े तीन विवादित विधेयकों को ध्वनि मत से पास कराए जाने के मसले पर संसद में कई दिनों तक चली राजनीति अब सड़कों पर आ गई है। देश भर के किसान संगठनों ने शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान किया है। देश की कई राजनीतिक दलों ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है। भारतीय किसान यूनियन सहित देश के अनेक किसान संगठन भारत बंद के इस आह्वान में शामिल हैं। उन्होंने पूरे देश में चक्का जाम करने का ऐलान किया है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत ने दावा किया है कि कृषि विधेयकों के विरोध में पूरे देश में 25 सितंबर को चक्का जाम रहेगा। उन्होंने कहा कि इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित करीब पूरे देश के किसान संगठन अपनी विचारधाराओं से ऊपर उठ कर एकजुट होंगे। किसान संगठनों ने इन विधेयकों को किसान विरोधी और कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने वाला बताया है। किसान संगठनों और लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार से इन विधेयकों को वापस लेने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी की गारंटी देने के लिए कानूनी प्रावधान करने की मांग की है।

विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिल कर उनसे कहा है कि वे इन विधेयकों पर दस्तखत न करें और वापस लौटाएं ताकि इन्हें विचार के बाद वोटिंग के जरिए दोबारा पेश किया जा सके। गौरतलब है कि सरकार ने राज्यसभा में विपक्ष की मांग के बावजूद इन विधेयकों पर वोटिंग नहीं कराई और हंगामे के बीच ध्वनि मत से पास कराया। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने विधेयकों पर किसानों की सहमति नहीं ली।

बहरहाल, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से 25 सितंबर को आहूत भारत बंद को लेकर किसान संगठनों का दावा है कि पूरे देश में किसान अपनी मांग को लेकर सड़क पर उतरने जा रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच पहली बार है, जब किसान सड़कों पर उतर रहे हैं। इससे पहले अभी तक वर्चुअल विरोध प्रदर्शन हो रहा था। राकेश टिकैत ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों का यह प्रदर्शन इसलिए खास है क्योंकि कोरोना के बावजूद किसान जमीन पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।

गौरतलब है कि संसद से पास किए गए तीन कृषि विधेयकों के जरिए सरकार ने कई बड़े बदलाव किए हैं। सरकारी मंडियों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को खुले बाजार में अपनी फसल बेचने की इजाजत दी है। एक दूसरे बिल में संविदा पर खेती के नियमों को मंजूरी दी गई। तीसरा बिल आवश्यक वस्तु कानून में बदलाव करने वाला है, जिसके मुताबिक कंपनियों को मनमानी मात्रा में अनाज और खाने-पीने की दूसरी चीजों के भंडारण की इजाजत दी गई है।

पंजाब में रेल रोको आंदोलन

कृषि से जुड़े तीन विवादित विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को पूरे देश में होने वाले भारत बंद से एक दिन पहले ही पंजाब में किसानों ने रेल रोको आंदोलन शुरू कर दिया है। किसान विद्रोह का केंद्र बने पंजाब में किसानों ने 24 से 26 सितंबर तक तीन दिन के रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया है। रेल रोकने के लिए अमृतसर, फिरोजपुर जिलों में किसान रेलवे लाइन पर धरने पर बैठ गए हैं, जिससे दिल्ली की तरफ आने-जाने वाली गाड़ियों का परिचालन बाधित हुआ है।

किसानों के आंदोलन को देखते हुए फिरोजपुर रेल मंडल ने 14 ट्रेनें रद्द कर दी हैं। किसानों ने एक अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए बंद का आह्वान किया है। संसद में पास किए गए विधेयकों को लेकर किसानों को चिंता है कि अगर एक बार मंडी के बाहर खरीद शुरू हो गई तो उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी प्रणाली से हाथ धोना पड़ सकता है।

बहरहाल, रेल रोको आंदोलन शुरू होते ही गुरुवार को अमृतसर के ग्रामीण इलाकों में किसान और उनके परिवार के सभी लोग सुबह में ही नजदीकी रेलवे लाइन पर जाकर बैठ गए। किसानों के आंदोलन को द्खते हुए रेलवे ने 24 से 26 सितंबर तक पंजाब में रेल परिचालन रद्द कर दिया है। 24 से 26 सितंबर तक कोई भी यात्री व माल गाड़ी पंजाब नहीं जाएगी। ट्रेनों को अंबाला कैंट, सहारनपुर और दिल्ली स्टेशन पर टर्मिनेट किया जाएगा।

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