कई राज्यों में दिखा बंद का असर

नई दिल्ली। तीन विवादित कृषि विधेयकों के विरोध में देश भर के किसान संगठनों की ओर से आयोजित भारत बंद का असर कई राज्यों में दिखा है। शुक्रवार को पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि इलाकों में बंद का जबरदस्त असर दिखा। दिल्ली-उत्तर प्रदेश और दिल्ली-हरियाणा सीमा पर भी बड़ी संख्या में किसानों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया और सड़क जाम किया। किसान आंदोलन में शामिल स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि संसद ने अपना काम कर दिया है अब सड़क का काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि किसान जानते हैं कि सरकार को कैसे घुटने पर लाया जाता है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से शुक्रवार को भारत बंद का आयोजन किया गया था।

किसानों के बुलाए भारत बंद का पंजाब और हरियाणा में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। किसान सुबह ही सड़क और रेलवे ट्रैक पर बैठ गए, जगह-जगह चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन किया। पंजाब में किसानों ने तीन दिन का रेल रोको आंदोलन भी चलाया है, जिसकी वजह से रेलवे ने अनेक ट्रेनों का परिचालन रोक दिया है।

पंजाब के कई लोक कलाकारों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। सबसे लोकप्रिय कलाकारों में से एक दलजीत दोसांज ने किसानों के समर्थन में सोशल मीडिया पर आवाज उठाई है। एक दूसरे कलाकार सिद्धू मूसेवाला किसानों के समर्थन में सड़क तक उतरे। किसानों को कांग्रेस, और लेफ्ट पार्टियों के साथ साथ अकाली दल का समर्थन भी हासिल है। बादल परिवार के गांव लांबी में पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने किसानों के प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

किसानों के साथ विरोध प्रदर्शन में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव भी शामिल हुए। उन्होंने केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए कहा- केंद्रीय कृषि मंत्री कहते हैं कि हमारे दरवाजे किसानों के लिए हमेशा खुले हैं लेकिन, उन्होंने तो विधेयक लाकर पहले ही ताला लगा दिया। उन्होंने बिल को पास करने से पहले किसी किसान बात नहीं की, यहां तक कि अपने सहयोगी अकाली दल और आरएसएस से जुड़े किसान संगठनों से भी बात नहीं की।

योगेंद्र यादव ने आगे कहा- किसान जानता है कि सरकार का अहंकार कैसे तोड़ा जाता है। अब तो कानून बन गया, संसद का काम खत्म हो गया। अब सड़क का काम शुरू हो गया है, सड़क पर विरोध होगा और सरकार को घुटने पर लाएंगे। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति बनाने के लिए 27 सितंबर को बैठक होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का नेतृत्व भारतीय किसान के नेता राकेश टिकैत ने किया।

विरोधियों पर भड़के मोदी

संसद के दोनों सदनों से हाल ही में पास हुए कृषि से जुड़े तीन विधेयकों के विरोधियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर भड़के हैं। पिछले एक हफ्ते में उन्होंने तीसरी बार इस बिल के विरोधियों पर हमला किया है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी पार्टियों को निशाना बनाते हुए शुक्रवार को कहा कि जिन्होंने दशकों तक किसानों के नाम पर सिर्फ नारे लगाए और खोखले वादे किए वे आज अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए उन्हीं के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों के बीच जाएं और इन विधेयकों के फायदे समझाएं। कृषि से संबंधित विधेयकों को किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव लाने वाला करार देते प्रधानमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे जमीनी स्तर पर छोटे-छोटे किसानों से मिलें और कृषि विधेयकों के फायदों के बारे में उन्हें बताएं।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बहुत ही कम समय में पिछले चुनाव में किए गए बड़े वादों को पूरा करने का काम किया है, जिनमें जम्मू व कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया जाना और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शामिल है। प्रधानमंत्री ने कृषि से जुड़े विधेयकों पर विपक्ष के विरोध को राजनीतिक स्वार्थ बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष अफवाहें फैलाकर किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

मोदी ने कहा- बहुत ही कम समय के भीतर हमने दशकों से चले आ रहे मामलों को निपटाया है। उन्होंने कहा- इसमें अनुच्छेद 370 , अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जैसे वो वादे भी शामिल हैं जो दशकों की हमारी तपस्या के आधार रहे हैं।  प्रधानमंत्री ने कहा- संकल्प सिद्ध करने की हमारी ताकत को बनाए रखना है।  मोदी ने कहा कि आजादी के बाद अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणा पत्र लिखे गए लेकिन समय की कसौटी ने सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थीं।

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