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राहुल के कथित बयान पर विवाद

नई दिल्ली। कांग्रेस कार्य समिति की सोमवार को हुई बैठक में कायदे से नेतृत्व में बदलाव, सामूहिक नेतृत्व, वैचारिक मुद्दों आदि के साथ साथ देश के हालात पर चर्चा होनी थी पर बैठक शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही राहुल गांधी के एक कथित बयान को लेकर विवाद छिड़ गया। कार्य समिति की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई, जिसके तुरंत बाद खबर आई कि राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को चिट्ठी लिखने वाले नेताओं से नाराजगी जाहिर की है और चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाया है। उन्होंने कथित तौर पर यह कहा कि भाजपा से मिलीभगत करके चिट्ठी लिखी गई है।

राहुल के इस कथित बयान पर तुरंत ही विवाद शुरू हो गया और उनके बयान का विरोध होने लगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने सबसे तीखा विरोध किया। गुलाम नबी आजाद भी उनके साथ विरोध में शामिल थे। चिट्ठी लिखने वाले 23 लोगों में इन दोनों का नाम मुख्य है। हालांकि बाद में कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी ने ‘भाजपा के साथ मिलीभगत’ जैसा या इससे मिलता-जुलता एक शब्द भी नहीं बोला था।

कांग्रेस की इस सफाई से पहले विवाद बढ़ चुका था। राहुल का कथित बयान सामने आने के आधे घंटे के भीतर पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने ट्विट किया- हमने राजस्थान हाई कोर्ट में कांग्रेस पार्टी का केस कामयाबी के साथ लड़ा। बीते 30 साल में कभी भी, किसी भी मुद्दे पर भाजपा के पक्ष में बयान नहीं दिया। फिर भी हम भाजपा के साथ मिलीभगत में हैं? कुछ देर बात सिब्बल ने ट्विटर से अपना परिचय बदल दिया और कांग्रेस शब्द को हटा दिया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भी कहा कि अगर भाजपा से मिलीभगत होने के राहुल गांधी के आरोप साबित हुए तो वे इस्तीफा दे देंगे।

इसके बाद कांग्रेस डैमेज कंट्रोल में जुटी। खुद राहुल गांधी ने कपिल सिब्बल से बात की, जिसके बाद सिब्बल ने अपना ट्विट हटा लिया। उन्होंने एक दूसरी ट्विट में कहा कि राहुल गांधी ने उनको निजी तौर पर बताया है कि उन्होंने भाजपा से मिलीभगत की कोई बात नहीं कही है। बाद में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने डेढ़ बजे के करीब कहा कि राहुल ने ‘भाजपा के साथ मिलीभगत’ जैसा या इससे मिलता-जुलता एक शब्दज भी नहीं बोला था। इसके बाद गुलाम नबी आजाद ने चार बजे के करीब सफाई दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने ऐसा कभी नहीं कहा। न ही सीडब्लुसी में और ना ही इसके बाहर।

सोनिया बनी रहेंगी अंतरिम अध्यक्ष

कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उठे तूफान का झाग बैठ गया है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में तय किया गया है कि सोनिया गांधी अभी अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि कांग्रेस कार्य समिति अगले छह महीने में नए अध्यक्ष का चुनाव करेगी। इससे पहले सोमवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक सात घंटे तक चली। बैठक शुरू होते ही सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष का पद छोड़ने की इच्छा जताई, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल ठुकरा दिया। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने उनसे अभी पद पर रहने की अपील की। बाद में तय कर लिया गया है कि नए अध्यक्ष का का चयन छह महीने के भीतर कर लिया जाएगा। बैठक में यह भी फैसला किया गया कि कांग्रेस कार्य समिति की अगली बैठक जल्दी से जल्दी बुलाई जाएगी, ताकि नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू की जा सके। कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी नेतृत्व में बदलाव के लिए चिट्ठी लिखने वालों पर भी बयान दिया।

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