गुजरात की नगरपालिका में भाजपा का परचम

अहमदाबाद। पंजाब में शहरी निकायों में कांग्रेस की भारी जीत के बाद अब गुजरात में भाजपा ने परचम लहराया। गुजरात के छह शहरों में महानगरपालिका के चुनाव हुए थे, जिनमें भाजपा को जबरदस्त जीत हासिल हुई है। 21 फरवरी को इन शहरों में वोटिंग हुई थी, जिसकी गिनती मंगलवार को हुई। छह शहरों की महानगरपालिका की 571 सीटों में भाजपा ने चार सौ से ज्यादा सीटें जीती हैं और सभी निकायों में बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस पार्टी को 50 के करीब सीटों पर संतोष करना पड़ा है।

गौरतलब है कि गुजरात में छह महानगरों- अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, भावनगर और राजकोट में 21 फरवरी को वोटिंग हुई थी। अहमदाबाद की नारायणपुरा सीट पर महिला उम्मीदवार बिंद्रा सूरती के सामने कोई उम्मीदवार न होने की वजह से भाजपा यह सीट चुनाव पूरे होने से पहले ही जीत चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए शहरी निकाय के चुनावों में पूरी ताकत झोंकी थी।

इन चुनावों के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 21 फरवरी को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने के बावजूद गृह मंत्री अमित शाह अपने पूरे परिवार के साथ वोट डालने के लिए पहुंचे थे। भाजपा के प्रदेश नेताओं, सरकार के मंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। गांधीनगर और जूनागढ़ को छोड़ कर इन छह महानगरपालिकाओं का कार्यकाल पिछले साल दिसंबर में ही पूरा हो गया था, लेकिन कोरोना की वजह से चुनाव नहीं हो पाए थे। इस वजह से निगम सरकार को भंग कर दिया गया था। म्युनिसिपल कमिश्नर ही निगम को चला रहे थे।

इन चुनावों में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है। सूरत में 2015 के चुनाव में भाजपा जीती थी पर कांग्रेस को भी अच्छी सफलता मिली थी। लेकिन इस बार कांग्रेस को सूरत में बड़ा नुकसान हुआ है। माना जा रहा है कि पाटीदार आरक्षण समिति ने कांग्रेस का विरोध किया और दूसरे आम आदमी पार्टी ने पाटीदार समाज के लोगों को बड़ी संख्या में टिकट दी। यहीं वजह रही कि सूरत में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा। अब कांग्रेस में हार्दिक पटेल के लिए यह बडा झटका है।

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