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असम गण परिषद भी विरोध में उतरी

नई दिल्ली। अब तक नागरिकता कानून में संशोधन के मसले पर केंद्र सरकार का साथ दे रही उसकी सहयोगी पार्टी असम गण परिषद भी अब इसके विरोध में उतर आई है। इससे पूर्वोत्तर में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच भाजपा को बड़ा झटका लगा है। असम गण परिषद ने नागरिकता कानून के विरोध में पूर्वोत्तर में चल रहे आंदोलनों का समर्थन करने का ऐलान किया है। असम गण परिषद ने वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक के बाद यह फैसला किया है।

पार्टी ने यह भी कहा है कि वो नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। इस मुद्दे पर असम गण परिषद की एक टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेगी। गौरतलब है कि असम गण परिषद भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार का भी हिस्सा है और राज्य की कैबिनेट में उसके तीन मंत्री भी हैं।

इससे पहले असम गण परिषद ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन किया था। उसके बाद पार्टी में ही इसका विरोध शुरू हो गया था और पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बहरहाल, अगप से पहले ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, आसू ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

आसू के प्रमुख सलाहकार समज्जुल भट्टाचार्य ने असम के लोगों से कथित विश्वासघात करने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना की और इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। नागरिकता कानून को लेकर सबसे ज्यादा और हिंसक प्रदर्शन देश के पूर्वोत्तर राज्यों में हो रहे हैं। हालांकि दो दिन से हिंसक विरोध थम गया है। छिटपुट घटनाओं के अलावा गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, शिलांग समेत दूसरे संवेदनशील इलाकों में शांति हैं। गुवाहाटी और शिलांग में रविवार को दूसरे दिन कर्फ्यू में ढील दी गई। डिब्रूगढ़ में रविवार की सुबह सात बजे से लेकर शाम चार बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई।

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