सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान - Naya India
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सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान

देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूट कर नदी में गिरने से आई बाढ़ में बह गए लोगों को तलाशने या बचाने का काम 24 घंटे बीतने के बाद भी सोमवार को जारी रहा। राहत व बचाव के काम में लगी टीमें एक तरफ तो बाढ़ में बह गए लोगों के शव तलाश रही है तो दूसरी ओर इधर-उधर फंसे लोगों को निकालने का प्रयास भी कर रही है। राहत व बचाव में लगी टीमों को तपोवन की एक सुरंग में लोगों के फंसे होने की सूचना मिली। इन लोगों को सुरंग से निकालने का प्रयास देर शाम तक जारी था। सुरंग के अंदर गाड़ियों में लोगों के फंसे होने का अंदाजा है, जिसमें काफी लोग जीवित हो सकते हैं।

चमोली की 12 फीट ऊंची और 15 फीट चौड़ी तपोवन सुरंग मलबे और कीचड़ से भरी हुई है और इसके अंदर मजदूर फंसे हुए हैं। यह सुरंग करीब ढाई किलोमीटर लंबी है। देर शाम तक मिली सूचना के मुताबिक इसमें से 130 मीटर तक सुरंग को साफ कर लिया गया था। बताया जा रहा है कि इसमें डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर एक गेट है। वहां तक पहुंचने में ही मुश्किल हो रही है। हालांकि तब तक यह पता नहीं चल पाया था कि सारे मजदूर एक साथ हैं या अलग अलग फंसे हुए हैं। राहत व बचाव कार्य में लगी टीमों के साथ स्थानीय नागरिक भी कुदाल और फावड़ा लेकर सुरंग की सफाई में जुटे हैं।

भारत तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी के जवान राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल के साथ मिल कर बचाव का काम कर रहे हैं। सोमवार की शाम में आईटीबीपी के प्रवक्ता के हवाले से खबर आई कि बचाव दल ने एक सौ मीटर तक सुरंग साफ कर ली है और अब थोड़ी दूरी तक और सफाई करनी है। इसमें कुछ घंटे लगने का अंदाजा था। सो, संभव है कि देर रात तक बचाव दल सुरंग के आखिरी सिरे तक पहुंच जाए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी शाम में कहा कि रात तक टीम वहां तक पहुंच जाएगी।

बताया गया है कि राहत व बचाव के लिए सुरंग में लकड़ी के तख्ते, स्ट्रेटर्स और ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर गए हैं। लकड़ी के तख्तों का इस्तेमाल कीचड़ में रास्ता बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे पहले हादसे के दिन रविवार को इसी इलाके में एक छोटी सुरंग से 12 मजदूरों को आईटीबीपी की टीम ने बचाया था। तपोवन सुरंग में आईटीबीपी के तीन सौ से अधिक और सेना व आपदा राहत बलों के करीब दो सौ लोग बचाव अभियान में जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री से मिले उत्तराखंड के सांसद

संसद के बजट सत्र में हिस्सा ले रहे उत्तराखंड के सांसदों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी उत्तराखंड के सांसदों से मिले। बताया जा रहा है कि सांसदों ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने आई प्राकृतिक आपदा को लेकर चल रहे राहत के प्रयासों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। उत्‍तराखंड के सांसदों के जरिए पीएम मोदी ने आगे बढ़ने का संदेश दिया।

बताया जा रहा है कि उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से भरे राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के चक्र को समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा और इन आपदाओं के कारण जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं का अपनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और उसके सभी संस्थान आपदा की इस अवधि में उत्तराखंड के साथ खड़े हैं, जीवन के नुकसान को कम करने और राहत के प्रयासों में सहायता के लिए सभी मदद की जाएगी।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने बढ़ाया मदद का हाथ

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूट कर नदी में गिरने से आई प्राकृतिक आपदा के बाद दुनिया भर के देशों ने संवेदना जताई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने आपदा की इस घड़ी में भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा कि ब्रिटेन हर तरह की मदद देने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि रविवार को हुए इस हादसे में अब तक 18 लोगों के मरने की आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई है, जबकि दो सौ से ज्यादा लोग लापता हैं।

बहरहाल, बोरिस जॉनसन ने कहा कि उत्तराखंड में आई बाढ़ के बाद ब्रिटेन भारत की हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने ट्वीट करके कहा- मेरी संवेदनाएं ग्लेशियर फटने के बाद आई विकराल बाढ़ का सामना कर रहे भारत के लोगों और उत्तराखंड के बचावकर्मियों के साथ हैं। संकट की इस घड़ी में ब्रिटेन भारत के साथ मजबूती से खड़ा है और किसी भी तरह की मदद करने के लिए तैयार है।

इस घटना के बाद, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और भारत में जापान के राजदूत सतोषी सुजुकी सहित दुनिया भर के कई दिग्गज नेताओं ने ग्लेशियर फटने की घटना से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं।

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