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जनसंख्या रजिस्टर अपडेट होगा

नई दिल्ली। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी पर देश भर में चल रही बहस और विरोध के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर को अपडेट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 2021 में होने वाली जनगणना के बजट को भी मंजूरी दे दी है। एनपीआर को अपडेट करने का अगले साल होगा। यानी 2020 में जनसंख्या रजिस्टर अपडेट होगा और उसके अगले साल 2021 में जनगणना होगी। इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि एनपीआर के लिए किसी सबूत की जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपने नागरिकों पर भरोसा है।

बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। भारत की जनगणना 2021 के लिए 8,754.23 करोड़ रुपए के बजट की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने के लिए 3,941.35 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई।

इसकी जानकारी देते हुए सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि जनगणना के लिए कोई लंबा फार्म नहीं भरना होगा। यह स्वयं घोषित स्वरूप का होगा। इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं होगी और न ही कोई दस्तावेज देना होगा। इसके लिए एक मोबाइल एप भी बनाया गया है। एनपीआर के उद्देश्यों में कहा गया है कि एनपीआर देश के स्वाभाविक निवासियों का रजिस्टर है। यह नागरिकता संशोधन कानून 1955 और नागरिकों के पंजीकरण व राष्ट्रीय पहचान कार्ड जारी करने के नियम 2003 के प्रावधानों के तहत गांव, शहर, उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाएगा।

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक एनपीआर अप्रैल और सितंबर 2020 के बीच असम को छोड़ कर देश के अन्य सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। यह जनगणना के साथ होगा। असम को इससे अलग इसलिए रखा गया है क्योंकि वहां पहले ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का काम हो गया है। एनपीआर का मकसद देश के स्वाभाविक निवासियों की समग्र पहचान का डाटाबेस तैयार करना है। इसमें भौगोलिक और बायोमेट्रिक जानकारी उपलब्ध होगी।

दूसरी ओर  जनगणना 2021 का काम दो चरणों में होगा। इसमें पहले चरण में घर की सूची या घर संबंधी गणना होगी जो अप्रैल से सितंबर 2020 तक होगी। इसका दूसरा चरण नौ फरवरी से 28 फरवरी 2021 को होगा। इसकी संबद्धता तिथि एक मार्च 2021 होगी। बर्फ से प्रभावित जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में संबद्धता तिथि एक अक्टूबर 2020 होगी।

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