मजदूरों के मामले में केंद्र ने दिया हलफनामा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मजदूरों के पलायन के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया है, जिसमें उसने बताया है कि सरकार ने मजदूरों के लिए क्या क्या किया। सरकार ने सर्वोच्च अदालत को बताया है कि मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। यह भी कहा गया है कि कई राज्य सरकारों ने बसों की सुविधा दी और मजदूरों को मुफ्त में खाना-पानी, दवाइयां, कपड़े, चप्पल और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराई गईं। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट नौ जून को फैसला सुनाएगा।

सरकार ने अदालत को बताया है कि सड़क पर पैदल चल रहे मजदूरों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एनएचएआई की मदद से उनके घर तक पहुंचाया गया। सरकार ने हलफनामे में यह भी कहा कि राज्य सरकारें और रेलवे प्रवासी मजदूरों को मुफ्त में भोजन और पानी उपलब्ध कराते हैं। एक जून तक रेलवे ने संबंधित राज्य सरकारों की ओर से दी जा रही सुविधाओं को छोड़कर 1.63 करोड़ भोजन के पैकेट और 2.10 करोड़ से ज्यादा पानी की बोतलें बांटी हैं।

केंद्र सरकार ने अदालत से कहा है कि कई राज्य सरकारों ने पैदल चल रहे मजदूरों  के रूकने के लिए भी व्यवस्था की। जगह-जगह कैंप बनाए गए थे, जहां मजदूरों को रहने, खाने-पीने की सुविधा दी गई। बीमार पड़ने वाले मजदूरों को मेडिकल सहायता दी गई। इसके एक दिन पहले पांच जून को सुप्रीम कोर्ट में प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर सुनवाई हुई थी, जिसमें अदालत ने केंद्र सरकार से मजदूरों को अगले 15 दिनों में उनके घर तक पहुंचाने को कहा था। अदालत ने केंद्र और राज्यों की तमाम दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब मंगलवार नौ जून को इस मामले में फैसला आना है।

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