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राजस्थान में सत्र बुलाने पर टकराव

जयपुर। राजस्थान में अनोखी स्थिति बन गई है, जो भारत की राजनीति में आज तक देखने को नहीं मिली। किसी राज्य में अगर सत्तारूढ़ पार्टी में टूट-फूट होती है तो विपक्ष विधानसभा का सत्र बुला कर बहुमत साबित करने की मांग करता है। पर राजस्थान में उलटा हो रहा है। विपक्षी पार्टी सरकार अल्पमत में बता रही है लेकिन सत्र बुला कर बहुमत साबित करने की मांग नहीं कर रही है। दूसरी ओर सरकार सत्र बुलाना चाहती है पर राज्यपाल कोरोना वायरस के नाम पर सत्र नहीं बुला रहे हैं।

इस दिलचस्प स्थिति में शुक्रवार को राजधानी जयपुर में खूब ड्रामा हुआ। सत्र बुलाने की मांग करते हुए कांग्रेस के विधायकों ने राजभवन के सामने धरना दिया। बाद में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल के सामने बहुमत होने का दावा किया और करीब चार घंटे के बाद विधाय़कों ने धरना खत्म कर दिया। धरना खत्म करने के बाद विधायक फिर फेयरमाउंट होटल लौट गए, जहां वे पिछले दो हफ्ते से डेरा डाले हुए हैं। राजभवन के सामने धरने पर गहलोत ने कहा कि भैरोसिंह शेखावत ने यहीं धरना दिया था।

इससे पहले गहलोत ने कहा कि उन्होंने सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को चिट्‌ठी लिखी पर उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद गहलोत सभी विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ विधायकों के साथ चर्चा की। गहलोत ने मुलाकात के बाद कहा- उम्मीद है संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल अपना कर्तव्य निभाएंगे। वो दबाव में नहीं आएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा- राजस्थान में उल्टी गंगा बह रही है। सत्ता पक्ष सत्र बुलाने की मांग कर रहा है, पर ऐसा नहीं किया जा रहा। यह समझ से परे है।

गहलोत के साथ पहुंचे विधायकों ने लॉन में बैठ कर नारेबाजी की। इसके बाद राज्यपाल ने विधायकों से बाहर आकर मुलाकात भी की। लेकिन, विधायक विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। राज्यपाल ने कहा कि इतने शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाना संभव नहीं है। हालांकि, शाम को विधायकों ने धरना खत्म कर दिया और होटल लौट गए। कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से राज्यपाल अभी विधानसभा सत्र बुलाने के पक्ष में नहीं हैं।

इन खबरों पर राजस्थान के मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि अगर सत्र ना बुलाने की वजह कोरोना वायरस है, तो हम दो सौ विधायकों का कोरोना टेस्ट करवाने को तैयार हैं। इससे पहले गहलोत ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा- हमें उम्मीद थी कि रात को आदेश जारी कर देंगे। अब तक इंतजार किया, लेकिन जवाब नहीं आया है। यह बात समझ से परे है, क्योंकि गवर्नर साहब को मानना ही पड़ता है। अनुरोध को रोकने का कोई कारण नहीं है। ऊपर से दबाव के चलते तो वे ऐसा नहीं कर रहे हैं? उन्होंने राज्यपाल कलराज मिश्र के लिए कहा कि उनका अपना एक कद है, सभी उनका सम्मान करते हैं इसलिए उन्हें बिना किसी के दबाव में आए फैसला करना चाहिए।

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