सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी रूकी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच मामलों की सुनवाई के लिए सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक पहल की। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। सर्वोच्च अदालत ने साथ ही कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए कोर्ट परिसर में सभी वकीलों के चेंबर अगले आदेश तक बंद रहेंगे। साथ ही अदालत में व्यक्तिगत पेशी पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। अदालत ने कहा कि सिर्फ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जरूरी मामलों की सुनवाई होगी। इस बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट 28 मार्च तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, एनजीटी को 31 मार्च कर बंद कर दिया गया है।

अलग अलग जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के मामले में सर्वोच्च अदालत ने सभी राज्य सरकारों को विधि सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का आदेश दिया है। यह कमेटी विचार करेगी कि किन आरोपियों को परोल या जमानत पर छोड़ा जा सकता है। संक्रमण को देखते हुए एनजीटी ने 31 मार्च तक अपनी सारी सुनवाई टाल दी है। एनजीटी ने सोमवार को जारी एक सरकुलर में कहा कि एनजीटी और जोनल बेंच के सभी मामले 31 मार्च तक रोक दिए गए हैं। 23 से 31 मार्च के बीच होने वाली सारी सुनवाई अब 14-15 जुलाई को होगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए पिछले दिनों ऐहतियाती कदम उठाने की बात कही थी। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने देश में वर्चुअल कोर्ट शुरू करने के संकेत दिए थे। सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों, पत्रकारों और दूसरे लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग पहले ही शुरू की जा चुकी है। कई राज्यों में उच्च अदालतों ने भी भीड़ कम करने के कई उपाय किए हैं।

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