बिल खिलाफ पूर्वोत्तर बंद!

गुवाहाटी। नागरिकता कानून में संशोधन करके पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किए जाने के विरोध में पूर्वोत्तर में जबरदस्त आंदोलन शुरू हो गया है। मंगलवार को इस बिल के विरोध में समूचा पूर्वोत्तर बंद रहा। असम के दो जिलों में कई जगह आगजनी हुई तो हिंसा और आंदोलन को देखते हुए त्रिपुरा में इंटरनेट के इस्तेमाल पर 48 घंटे के लिए पाबंदी लगा दी गई।

पूर्वोत्तर के अलग अलग राज्यों के छात्र संगठनों की तरफ से संयुक्त रूप से बुलाया गया 11 घंटे का बंद मंगलवार सुबह पांच बजे शुरू हुआ। पूर्वात्तर छात्र संगठन, एनईएसओ ने इस विधेयक के खिलाफ शाम चार बजे तक बंद का आह्वान किया था। कई अन्य संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इसे अपना समर्थन दिया था। इस बंद की वजह से असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नगालैंड में चल रहे हॉर्नबिल महोत्सव की वजह से राज्य को बंद के दायरे से बाहर रखा गया था।

असल में पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिकों को लग रहा है कि पड़ोसी देशों के लोगों को नागरिकता देकर बसाने से इन राज्यों के मूल वासियों की पहचान और आजीविका खतरे में पड़ सकती है। बहरहाल, सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह के साफ किया कि मणिपुर को इनर लाइन परमिट, आईएलपी के दायरे में लाया जाएगा। इसकी वजह  से राज्य में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे द मणिपुर पीपल अगेंस्ट कैब ने अपने बंद को स्थगित करने की घोषणा की।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को एक से छह साल के अंदर भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। सोमवार को आधी रात में इसे लोकसभा से पास किया गया। पूर्वोत्तर के राज्यों में इस विधेयक का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। मंगलवार को बंद के दौरान डिब्रूगढ़ और जोरहाट में आगजनी की घटना हुई तो त्रिपुरा में इंटरनेट बंद कर दिया गया।

कांग्रेस, एआईयूडीएफ, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, कृषक मुक्ति संग्राम समिति, ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन, खासी स्टूडेंट्स यूनियन और नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन जैसे संगठनों ने बंद का समर्थन किया। गुवाहाटी विश्वविद्यालय और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय ने बुधवार को होने वाली अपनी सभी परीक्षाएं टाल दी हैं। वैसे यह विधेयक अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम में लागू नहीं होगा, जहां आईएलपी की व्यवस्था है इसके साथ ही संविधान की छठी अनुसूची के तहत शासित होने वाले असम, मेघालय और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्र भी इसके दायरे से बाहर होंगे।

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