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गुजरात सरकार को हाईकोर्ट की फटकार

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में कोरोना वायरस के संक्रमण से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कोरोना की वजह से लोगों को हो रही परेशानी को लेकर गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और सरकार के कामकाज पर तीखी टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि गुजरात के लोगों न अस्पताल में बेड्स मिल रहे हैं और न दवाएं मिल रही हैं, लोगों को लग रहा है कि वे भगवान भरोसे जी रहे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि लोगों का भरोसा कम हो गया है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि प्रदेश और लोग जिस तरह की दिक्कतें झेल रहे हैं, वह सरकार के दावे से बहुत अलग है। चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस भार्गव करिया की बेंच ने कहा कि लोगों को लगने लगा है कि वे अब भगवान भरोसे हैं। एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में अदालत को बताया। लेकिन अदालत ने ज्यादातर दलीलों को मानने से इनकार कर दिया।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में अदालत ने एडवोकेट जनरल से कहा- आप जो दावा कर रहे हैं, स्थिति उससे काफी अलग है। आप कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। इस समय लोगों में भरोसे की कमी है। लोग सरकार को कोस रहे हैं और सरकार लोगों को। इससे कुछ नहीं होगा। हमें संक्रमण की चेन तोड़ने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रेमडिसिविर इंजेक्शन की कमी है और इसके लिए एक अस्पताल के बाहर लंबी लाइन लगी है।

राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने इंजेक्शन की कमी के कारण बताते हुए कहा कि कंपनियों से सप्लाई कम है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सात कंपनियां यह इंजेक्शन बनाती हैं। उनकी एक दिन की उत्पादन क्षमता सिर्फ पौने दो लाख की है, जिसमें से सरकार हर दिन करीब 25 हजार इंजेक्शन खरीद रही है। इस पर हाई कोर्ट ने पूछा कि सरकार क्यों इसकी सप्लाई पर कंट्रोल कर रही थी, जब लोग इसके लिए भागदौड़ कर रहे थे?

अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा- जिन अस्पतालों में ये इंजेक्शन मिल रहे थे, वे भी कह रहे थे कि उनके पास दवा नहीं है। अदालत ने कहा- दवा उपलब्ध है, लेकिन सरकार की ओर से इसकी सप्लाई कंट्रोल की जा रही है। लोग इसे क्यों नहीं खरीद सकते? सरकार ये सुनिश्चित करे कि यह हर जगह उपलब्ध हो। हम कारण नहीं रिजल्ट चाहते हैं।

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