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कर्नाटक ने पांच राज्यों से रोकी आवाजाही

बेंगलुरू। कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच कर्नाटक सरकार ने पांच राज्यों से लोगों के कर्नाटक आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने ऐहतियात बरतते हुए संक्रमण से ज्यादा प्रभावित पांच राज्यों से हर किस्मा का यातायात रोक दिया है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान से हर तरह की यात्रा पर फिलहाल पाबंदी लगाने का फैसला किया गया है।

गौरतलब है कि इन पांच राज्‍यों में कोरोना वायरस के संक्रमण की संख्‍या बहुत ज्यादा है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और राजस्थान से किसी भी उड़ान, ट्रेन या अन्य वाहनों को कर्नाटक में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। ध्यान रहे देश में कोरोना वायरस के सबसे ज्‍यादा मामले महाराष्‍ट्र से ही सामने आए हैं। यहां 57 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमण के शिकार हुए हैं। इसी तरह गुजरात में 15 हजार और तमिलनाडु में 18 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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