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स्वदेशी वैक्सीन को भी मंजूरी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के मोर्चे पर एक और बड़ी कामयाबी मिली है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को मंजूरी देने के बाद ड्रग रेगुलेटर की विशेषज्ञ समिति ने भारत में विकसित की गई स्वदेशी वैक्सीन को भी मंजूरी दे दी है। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी शुक्रवार को मिली थी। उसके एक दिन बाद शनिवार को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दी। अब इन दोनों वैक्सीन को अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है। अंतिम मंजूरी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, डीसीजीआई की ओर से मिलेगी।

सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कोवैक्सीन के सशर्त इस्तेमाल की मंजूरी दी है। अब किसी भी समय कोवीशील्ड और कोवैक्सीन दोनों को डीसीजीआई की मंजूरी मिल जाएगी, उसके बाद पूरे देश में इसे पहुंचाने और वैक्सीनेशन का काम शुरू होगा। गौरतलब है कि भारत की देशी वैक्सीन कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण अभी चल रहा है। इसे दूसरे चरण के परीक्षण के आधार पर ही मंजूरी दी गई है।

कोवैक्सिन के दूसरे चरण के परीक्षण के नतीजे 23 दिसंबर को आए थे। 380 स्वस्थ बच्चों और वयस्कों पर इसका परीक्षण किया गया था। दूसरे चरण के परीक्षण में कोवैक्सिन ने हाई लेवल एंटीबॉडी प्रोड्यूस की। तीन महीने बाद भी सभी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी की संख्या बढ़ी हुई दिखी। इन नतीजों के आधार पर कंपनी का दावा है कि कोवैक्सिन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी छह से 12 महीने तक कायम रहती है।

भारत में अभी तक तीन कंपनियों ने कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्केमाल के लिए मंजूरी मांगी है। इनमें से कोवीशील्ड और कोवैक्सीन को सशर्त मंजूरी मिल गई है। कोवीशील्ड या को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया है। अदार पूनावाला की कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में इसका उत्पादन हो रहा है। एसआईआई ने भी भारत में इसका परीक्षण किया।

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