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विफलता दबाने के लिए ट्विट हटवा रही सरकार

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से निपटने की बजाय केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लोटफॉर्म ट्विटर पर डाली जा रही पोस्ट हटवाने में लगी है। सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लागू करते हुए केंद्र सरकार ने ट्विटर से कहा है कि वह कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने में सरकार की विफलता के बारे में डाली गई पोस्ट हटाए। हालांकि सरकार का दावा है कि सरकार अपने खिलाफ लिखी गई पोस्ट नहीं हटवा रही है, बल्कि कोरोना के बारे में फेक न्यूज वाले पोस्ट हटवा रही है। लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। मीडिया से जुड़े कई बड़े पत्रकारों और यहां तक की विरोधी पार्टी कांग्रेस के प्रवक्ता की पोस्ट भी हटवाई गई है, जिसमें उन्होंने सरकार की आलोचना की थी।

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अपनी पोस्ट हटाए जाने को लेकर सूचना व प्रौद्योगिक मंत्री रविशंकर प्रसाद और ट्विटर दोनों को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने कोरोना वायरस से निपटने में दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कुंभ मेला और तबलीगी जमात की मरकज का मामला उठाया था। उनकी इस ट्विट को हटा दिया गया है, जिसे उन्होंने कानूनी चुनौती दी है। ऐसे कई और पत्रकारों और नेताओं के ट्विट हटाए गए हैं।

इस बीच रविवार को ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा कि एक सौ के करीब ट्विट्स हटाए गए हैं। हालांकि अकाउंट्स को ब्लॉक नहीं किया गया है, उन्हें मेल के जरिए कार्रवाई की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर सरकार ने कहा कि फेक न्यूज फैलाने के लिए ये एक्शन लिया गया है इसलिए नहीं कि हमारी आलोचना की जा रही थी।

ट्विटर ने बताया कि सरकार ने कई ट्विट्स को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा था कि कुछ लोग इसके जरिए फेक न्यूज फैला रहे हैं। इनमें मीडियानामा, कांग्रेस के लोकसभा सांसद रेवांत रेड्डी, बंगाल के मंत्री मोलोय घटक, एक्टर विनीत कुमार सिंह और दो फिल्मकारों के ट्विट शामिल हैं। ट्विटर ने कहा- हम कोरोना पर गलत जानकारियों को हैंडल कर रहे हैं। इसके लिए हम प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और ह्यूमन रिव्यू का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमारी कोशिशें आगे भी जारी रहेंगी। ये हमारी प्राथमिकता है।

दूसरी ओर सरकार ने सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लगाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इन अकाउंट्स पर एक्शन इसलिए नहीं लिया गया हैं, क्योंकि वो सरकार की कोविड के हालात को नियंत्रित करने की शैली की आलोचना कर रहे थे, बल्कि ये कदम इसलिए उठाया गया है, क्योंकि ये पुरानी तस्वीरों और गलत खबरों के जरिए जनता में अफवाहें और डर फैला रहे थे। सरकार ने कहा कि कई ट्विटर हैंडल 24 घंटे सरकार की आलोचना कर रहे हैं, पर हमने इन्हें ब्लॉक करने के लिए ट्विटर से नहीं कहा।

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