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दिल्ली में भी खुलेंगी दुकानें

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद दिल्‍ली में दुकानें खोलने पर पैदा हुआ संशय खत्‍म हो गया है। गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक अब दिल्‍ली में भी दुकानें खुलेंगी। हालांकि दुकानों को खोलने के लिए कुछ शर्त रखी गई है। यहां शारीरिक दूरी का पूरा ध्‍यान रखना होगा और भी केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दुकान खोलने के जो भी निर्देश दिए गए है उनका सख्‍ती से पालन करना होगा।

इससे पहले शनिवार को सुबह से ही दिल्‍ली में दुकानें खोलने को लेकर संशय बना हुआ था। गौरतलब है कि शुक्रवार की देर रात गृह मंत्रालय की ओर से जारी हुए पत्र में कहा गया था कि राज्‍य सरकार कुछ शर्तों के साथ कुछ खास इलाके में गैरजरूरी सामानों की दुकानें खोल सकती हैं। बाद में कहा गया कि सैलून, ब्यूटी ट्रीटमेंट, स्पा आदि खोलने की अनुमति नहीं है। गृह मंत्रालय के नए आदेश के मुताबिक, किसी भी तरह के रेस्टोरेंट को खोलने की अनुमति नहीं मिली है।

गृह मंत्रालय ने स्‍पष्‍ट किया कि शहरी क्षेत्रों में सभी एक दुकानें, आस-पड़ोस की दुकान और आवासीय परिसरों में बनी दुकान को खोलने की अनुमति है। सरकार के गाइडलाइन के मुताबिक बाजार परिसरों और शॉपिंग मॉल में स्थित दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को सिर्फ जरूरी वस्तुओं की ही बिक्री करने की अनुमति है।

शराब के बारे में भी भ्रम को दूर करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि इसकी बिक्री प्रतिबंधित है। दिल्‍ली की ताजा स्‍थिति यह है कि यहां फिलहाल ढाई हजार मरीज संक्रमण के शिकार हुए हैं। यहां आबादी के हिसाब से आंकड़ा बहुत बड़ा नहीं है पर हॉट स्‍पॉट की संख्‍या 92 पहुंच गई है। गौरतलब है कि गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक हॉटस्पॉट इलाकों में किसी तरह की दुकानें नहीं खुलेंगी।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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