मजदूरों को मिली बस!

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, एनसीआर के इलाकों से पैदल ही अपने घर की ओर रवाना हुए हजारों मजदूरों को उत्तर प्रदेश सरकार ने बसों की सुविधा मुहैया कराई है। शनिवार को राज्य सरकार की ओर से बसें मुहैया कराई गईं, जिनसे इन मजदूरों को उत्तर प्रदेश और बिहार में उनके गृह जिलों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि ये बसें भी सभी मजदूरों को नहीं मिलीं। हजारों की संख्या में मजदूर पैदल ही चलते रहे। दिल्ली से तीन-चार सौ किलोमीटर की दूरी तक के गांवों के रहने वाले मजदूर पैदल ही अपने घर पहुंच गए।

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, साहिबाबाद, गुड़गांव, मानेसर जैसे इलाकों से हजारों की संख्या में मजदूरों का पलायन तीन दिन से चल रहा था पर शुक्रवार को न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया में इसके वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद सरकार की नींद खुली और कुछ बसों की व्यवस्था की गई। हालांकि इसके बावजूद ज्यादातर मजदूर पैदल ही चलते रहे। इनमें कई मजदूर बीमार भी हुए। शुक्रवार की रात से रास्ते में खाने-पीने की व्यवस्था हो जाने से मजदूरों की मुश्किल थोड़ी कम हुई।

बहरहाल, उत्तर प्रदेश के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि मुख्यमंत्री ने शुक्रवार की रात को ही एक हजार बसों के इंतजाम के आदेश दे दिए थे। हालांकि शनिवार को दो सौ बसें ही लगाए जाने की खबर आई। बहरहाल, बताया गया कि शुक्रवार की रात को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक ही और रातों रात परिवहन अधिकारों को निर्देश दिए गए और ड्राइवर व कंडक्टर घरों से जगा कर बुलाए गए।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन की घोषणा के बाद ही मजदूरों ने दिल्ली और एनसीआर से पलायन शुरू कर दिया था। पर गुरुवार को अचानक इनकी संख्या बहुत बढ़ गई। हजारों की संख्या में लोग छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ पैदल ही अपने घर की ओर रवाना हो गए। पहले तो मजदूरों को रोकने का प्रयास हुआ पर जब इनकी संख्या बहुत बढ़ गई और इसके वीडियो चारों तक दिखाए जाने लगे तब सरकार को मजबूरी में बसों की व्यवस्था करनी पड़ी।

बहरहाल, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बताया है कि बसों के साथ साथ डॉक्टर, सैनिटाइजर और भोजन की भी व्यवस्था की गई है। बस में बैठने से पहले मजदूरों की स्क्रीनिंग हो रही है और बच्चों वगैरह को भोजन भी दिया जा रहा है। राज्य प्रशासन ने अलग अलग जगहों पर बसों की व्यवस्था की है। पुलिस की मदद से लोगों को कतार में खड़ा किया जा रहा है, उनके हाथों पर सैनिटाइजर लगाया जा रहा है और इलाकेवार बसों की सेवा दी जा रही है।

राज्य सरकार ने रास्ते में भी लोगों के खाने की व्यवस्था कराई है। दिल्ली और एनसीआर से पैदल पलायन करने वालों में ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश के ही हैं। उन्हें कानपुर, बलिया, बनारस गोरखपुर, आजमगढ़, फैजाबाद, बस्ती, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, गोंडा, इटावा, बहराइच, श्रावस्ती जैसे कई जिलों में बसों के जरिए भेजा गया है। हालांकि बसों की व्यवस्था करने के बावजूद सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे जहां हैं वहीं रहें, वहीं पर उनके लिए सारी व्यवस्था की जाएगी।

बस देने से नीतीश हुए नाराज

कोरोना वायरस के संक्रमण से घबराए और लॉकडाउन से परेशान मजदूरों ने दिल्ली और एनसीआर से पलायन शुरू किया तो बिहार में राज्य सरकारें की सांस फूलने लगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था की तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि विशेष बस से लोगों को भेजना एक गलत कदम है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार अपने लोगों को बसों में भर कर उनके घरों तक पहुंचा रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। पर नीतीश को यह बात पसंद नहीं आई है कि दिल्ली या एनसीआर से प्रवासी बिहारी मजदूर वापस लौटें।

उन्होंने पैदल रवाना हुए मजदूरों के लिए बस की व्यवस्था किए जाने पर कहा कि इससे बीमारी और फैलेगी, जिसकी रोकथाम और निबटना सबके लिए मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला लॉकडाउन को पूरी तरह फेल कर देगा। नीतीश ने सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर ही कैंप लगा कर लोगों के रहने और खाने का इंतजाम किया जाए। प्रवासी बिहारी मजदूर वापस नहीं लौटें, इसके लिए नीतीश ने एक सौ करोड़ रुपए का फंड बना कर कहा है कि वे जहां हैं वहीं उनकी मदद की जाए।

गौरतलब है कि दिल्ली और एनसीआर में काम करने वाले हजारों प्रवासी मजदूर वापस अपने घर जाना चाहते हैं। दिल्ली में काम धंधा बंद होने से उनको परेशानी है पर साथ ही उनके वापस लौटने का कारण ज्यादा भावनात्मक है। दिल्ली सरकार ने इन लोगों के लिए अच्छा इंतजाम किया है। लेकिन इन लोगों का कहना है कि जो भी बीमारी है वह गांव घर में मिल कर झेली जाएगी।

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