मंदिर वहीं बनेगा!

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी के नेता और दूसरे साधु-संत राम मंदिर आंदोलन के समय नारा लगाते थे- सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे! अब देश की सर्वोच्च अदालत ने उनको वहां मंदिर बनाने की इजाजत दे दी है। दशकों तक चली अदालती सुनवाइयों के बाद आखिरकार शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने आम सहमति से फैसला सुनाया और करीब दो सौ साल पुराने इस मामले का पटाक्षेप कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्सों में बांटने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले को निरस्त कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने पूरी विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला को दे दिया। उसने जमीन पर निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवादित जमीन पर केंद्र सरकार मंदिर का निर्माण कराएगी और इसके लिए तीन महीने में अदालत के सामने रूपरेखा पेश करेगी। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि पुरात्व विभाग ने मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं। अदालत ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट से जाहिर है कि मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं किया गया था। उसके नीचे पुरानी इमारत का ढांचा मिला है, जो इस्लामिक नहीं है। सैकड़ों पन्नों के फैसले का मूल हिस्सा पढ़ते हुए पीठ ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्मस्थल मानते हैं। पांच जजों की इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे।

चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत के लिए आस्था में जाना उचित नहीं है लेकिन पुरातत्व विभाग यह भी नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। उन्होंने कहा- मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष पूजा करते थे। मस्जिद कब बनीं साफ नहीं है। एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई गई थी। चीफ जस्टिस ने कहा- सबूत पेश किए गए हैं कि हिंदू बाहरी आहते में पूजा करते थे।

सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड एकल अधिकार का सबूत नहीं दे पाया। अदालत ने कहा- आखिरी नमाज दिसंबर 1949 को पढ़ी गई थी। सर्वोच्च अदालत ने 1949 में मंदिर परिसर में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में विवादित ढांचा तोड़े जाने को गलत बताया। अदालत ने यह भी कहा कि वह सबूतों के आधार पर फैसला करती है। केंद्र सरकार को मंदिर बनाने का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसे तीन महीने में योजना तैयार करने को कहा। इस योजना में बोर्ड ऑफ ट्रस्टी का गठन किया जाएगा और तब तक अधिग्रहीत जगह का कब्जा रिसीवर के पास रहेगा। अदालत ने मस्जिद के लिए अयोध्या में किसी प्रमुख जगह पर पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।

 

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