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हाईकोर्ट से केंद्र को मिली बड़ी राहत

नई दिल्ली। बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस बुरी तरह से घिरे थे पर गुरुवार को दोनों को बड़ी राहत मिल गई। गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने भड़काऊ या नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार को एक महीने समय दे दिया। इससे पहले बुधवार को जस्टिस एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली दो जजों की पीठ ने दिल्ली पुलिस से भड़काऊ भाषण देने के मामले में भाजपा के चार नेताओं पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने और गुरुवार को इसकी जानकारी देने को कहा था।

जस्टिस मुरलीधर ने कहा था कि भड़काऊ भाषण देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए। पीठ ने चार भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, अभय वर्मा और प्रवेश वर्मा के भाषण के वीडियो भी कोर्ट में चलवाए थे। अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर उसे फटकार लगाते हुए कहा था कि वह 1984 जैसे हालात फिर से बनने की अनुमति नहीं देगी। पर बुधवार की आधी रात को जस्टिस मुरलीधर के तबादले पर मुहर लग गई और गुरुवार को सरकार को बड़ी राहत मिल गई।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए और समय मांगते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ कुछ चुनिंदा भाषणों को नहीं चुन सकता है। उन्होंने अदालत से कहा- याचिकाकर्ता ने सिर्फ तीन चुनिंदा वीडियो का हवाला दिया है। मैं ध्यान दिलाना चाहता हूं कि याचिकाकर्ता याचिका में भाषणों का चयन नहीं कर सकता है। हमें इन भाषणों के अलावा भी कई और भाषण मिले हैं।

तुषार मेहता ने कहा- मौजूदा परिस्थितियों में, अभी एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। सही वक्ता पर पुलिस कार्रवाई करेगी। अभी ये समय इस तरह की कार्रवाई के लिए नहीं है। याचिकाकर्ता हर्ष मंदर ने अपनी याचिका में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने वाले भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी की मांग की थी। उनके वकील ने गुरुवार को अदालत से बिना किसी देरी के इन लोगों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केंद्र को भड़काऊ भाषणों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर जानकारी देने के लिए एक महीने का समय दे दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

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