कश्मीर में नाबालिग हिरासत पर जांच आदेश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट की चार सदस्यीय किशोर न्याय समिति को राज्य में अनुच्छेद 370 के अनेक प्रावधान रद्द करने के निर्णय के बाद सुरक्षा बलों द्वारा नाबालिगों को हिरासत में रखने के आरोपों की नये सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को किशोर न्याय समिति से कहा कि वह अपनी रिपोर्ट यथाशीघ्र पेश करे।

पीठ ने इसके साथ ही इस मामले को तीन दिसबंर को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया है। पीठ ने कहा कि इन आरोपों की नये सिरे से जांच की आवश्यकता है क्योंकि समिति की पहले की रिपोर्ट समयाभाव की वजह से शीर्ष अदालत के आदेश के अनुरूप नहीं थी। शीर्ष अदालत कश्मीर घाटी में गैरकानूनी तरीके से नाबालिगों को कथित रूप से हिरासत में लिये जाने का मुद्दा उठाने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और जम्मू कश्मीर प्रशासन के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि समिति को सौंपा गया काम समयाभाव की वजह से शीर्ष अदालत के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं किया गया। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत का 20 सितंबर का आदेश समिति के पास 23 सितंबर को पहुंचा था और दो दिन बाद जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक ने मीडिया और याचिका में इस बारे में किये गये दावों और आरोपों का 25 सितंबर को सिरे से खंडन किया।

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