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Thursday, May 6, 2021
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निर्भया के दोषियों की फांसी टलने पर केंद्र को आपत्ति

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नई दिल्ली।  निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड के दोषियों के मामले में एक बड़े घटनाक्रम में रविवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस सुनवाई केंद्र सरकार ने दोषियों का फांसी टलते जाने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। केंद्र ने कहा कि सोची समझी योजना के तहत फांसी की सजा टलवाई जा रही है। केंद्र ने यह भी कहा कि जिन दोषियों की दया याचिका खारिज हो गई है उन्हें फांसी दी जानी चाहिए। दूसरी ओर दोषियों के वकील ने कहा कि चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी हो सकती है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

असल में केंद्र सरकार ने निर्भया मामले के चार दोषियों की फांसी की सजा की तामील पर रोक के पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई के बाद जस्टिस सुरेश कैत ने कहा कि अदालत सभी पक्षों की दलीलें पूरी किए जाने के बाद आदेश पारित करेगी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के दोषी कानून के तहत मिली सजा पर अमल में देरी करने की सुनियोजित चाल चल रहे हैं।

तुषार मेहता ने इस पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को एक चार्ट बना कर दिया। इसमें बताया गया कि किसने कब-कब याचिका दाखिल की और कानून का किस तरह दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि साल-साल भर बाद याचिकाएं दाखिल की गई थीं। उन्होंने कहा- राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के बाद भी दोषी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। हर मौके पर देर की गई। उन्होंने बताया कि पवन की तरफ से न सुधारात्मक याचिका दाखिल की गई और ना ही दया याचिका। इन्हें यह लग रहा है कि अगर ये याचिका दाखिल नहीं करेंगे तो फांसी से बचे रहेंगे। तेलंगाना में सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना का जिक्र करते हुए तुषार मेहता ने कहा कि तब लोगों ने जश्न मनाया था। वह जश्न सिर्फ पुलिस के लिए नहीं था, बल्कि इंसाफ के लिए भी था।

तुषार मेहता ने कहा कि पवन ने 2018 में खुद को नाबालिग बताया, कोर्ट ने भी याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगाई गई, वह भी खारिज़ हो गई, तो उसके खिलाफ भी पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। उसे भी कोर्ट ने खारिज़ कर दिया। उन्होंने कहा कि मुकेश  की तरफ से 550 दिन बाद सुधारात्मक याचिका लगाई गई। अक्षय ने 950 दिनों के बाद समीक्षा याचिका लगाई, जिसे खारिज कर दिया गया था। तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि दोषियों की ओर से याचिका देरी से दखिल करके न्यायपालिक का मजाक उड़ाया जा रहा है।

सॉलिसीटर जनरल ने कहा- समाज और पीड़िता को न्याय के लिए इन सभी दोषियों को तुरंत फांसी पर लटकाने की जरूरत है। समाज के हित में और कानून के हित में निर्भया के गुनहगारों की फांसी में और देरी नहीं होना चाहिए। जज ने तुषार मेहता से पूछा- हमे बताइए कि सभी दोषी अलग-अलग दया याचिका लगा रहे हैं। दो की खारिज हो गई है और दो की राष्ट्रपति के पास पेंडिंग हैं, तो क्या किया जाएगा? इस पर तुषार मेहता ने कहा कि दो को फांसी दी जा सकती है। ऐसा नहीं है कि चारों को एक साथ दी जाएगी।

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