भयंकर मंदी की ओर है देश

कैंब्रिज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन ने देश में भयंकर आर्थिक मंदी का अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा है कि देश की मौजूदा आर्थिक सुस्ती बहुत बड़ी है और यह आईसीयू की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने इसे ‘ग्रेट स्लोडाउन’ कहा है। सुब्रमण्यन ने कहा है- ऐसा लग रहा है कि अर्थव्यवस्था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है। ट्विन बैलेंस शीट, टीबीएस संकट की दूसरी लहर अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। सुब्रमण्यन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अपने पेपर के प्रजेंटेशन के दौरान यह अंदेशा जताया।

सुब्रमण्यन ने दिसंबर 2014 में भी टीबीएस की समस्या को लेकर चेतावनी दी थी, उस वक्त वे मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। टीबीएस का मतलब कारपोरेट के कर्ज नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स, एनपीए होने से है, इससे बैंकों की मुश्किलें बढ़ती हैं। इसका मतलब है कि एक तरफ उद्योगपति परेशानी में हैं, इसलिए वे नया निवेश नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर बैंकों का एनपीए बढ़ेगा तो वे ज्यादा कर्ज नहीं दे पाएंगे। इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी।

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार सुब्रमण्यन ने नए रिसर्च पेपर में 2004 से 2011 तक स्टील, पावर और इंफ्रा सेक्टर के कर्ज जो कि एनपीए में बदल गए उन्हें टीबीएस-एक कहा। टीबीएस-दो से उनका मतलब प्रमुख रूप से नोटबंदी के बाद गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, एनबीएफसी और रिएल एस्टेट कंपनियों के नकदी संकट से है।

सुब्रमण्यन के मुताबिक पिछले साल सितंबर में सामने आया आईएलएंडएफएस का संकट भूकंप जैसी घटना थी। सिर्फ इसलिए नहीं कि आईएलएंडएफएस पर 90 हजार करोड़ रुपए के कर्ज का खुलासा हुआ, बल्कि इसलिए भी क्योंकि इससे बाजार प्रभावित हुआ और पूरे एनबीएफसी सेक्टर को लेकर सवाल खड़े हो गए। गौरतलब है कि सितंबर में खत्म हुई तिमाही में विकास दर, 4.5 फीसदी रह गई है। यह छह साल में सबसे कम है। सुब्रमण्यन का कहना है कि निर्यात, आयात और सरकार के राजस्व के आंकड़े भी बताते हैं कि अर्थव्यवस्था की स्थिति गंभीर है।

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