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Tuesday, April 13, 2021
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व्यापार करना सरकार का काम नहीं

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में निजीकरण की खुली वकालत करने के बाद अब कहा है कि व्यापार करना सरकार का काम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार रणनीतिक क्षेत्रों में कुछ सार्वजनिक उपक्रमों को छोड़ कर बाकी क्षेत्रों के उपक्रमों का निजीकरण करने को प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सरकारी कंपनियों को बेच कर अगले वित्त वर्ष में एक लाख 75  हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने तय किया है कि वह रणनीतिक सेक्टर में एक चौथाई कंपनियां अपने पास रखेगी और गैर रणनीतिक क्षेत्र की सारी कंपनियां बेच देगी। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीमार सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर आयोजित एक वेबिनार में कहा कि बजट 2021-22 में भारत को ऊंची विकास दर की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूप-रेखा बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा- बीमार सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है, सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं।

मोदी ने आगे कहा- व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं, सरकार का ध्यान जन कल्याण पर होना चाहिए। सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी एक सौ परिसंपत्तियों को बाजार में बेच कर ढाई लाख करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा सरकार मौद्रिकरण, आधुनिकीकरण पर ध्यान दे रही है। उन्होंने- निजी सेक्टर की तारीफ करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र से दक्षता आती है, रोजगार मिलता है। निजीकरण, संपत्ति के मौद्रिकरण से जो पैसा आएगा उसे जनता पर खर्च किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़ कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा- रणनीतिक महत्व वाले चार क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कम से कम स्तर पर रखा जाएगा। मोदी ने कहा कि भारत अब एक बाजार, एक कर प्रणाली वाला देश है, कर प्रणाली को सरल बनाया गया है, अनुपालन जटिलताओं में सुधार लाया गया है।

किसान सम्मान निधि योजना के दो साल

पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किसानों को छह हजार रुपए सालाना देने के लिए शुरू की गई किसान सम्मान निधि योजना के दो साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि इससे करोड़ों किसानों के जीवन में बदलाव आया है और वे आत्मनिर्भर भारत अभियान के अभिन्न अंग बन रहे हैं। मोदी ने एक के बाद एक कई ट्विट कर कहा- पीएम किसान निधि की लांचिंग को आज दो साल पूरे हो रहे हैं। अन्नदाताओं के कल्याण को समर्पित इस योजना से करोड़ों किसान भाई-बहनों के जीवन में जो बदलाव आए हैं, उससे हमें उनके लिए और अधिक काम करने की प्रेरणा मिली है।

प्रधानमंत्री ने कहा- अन्नदाताओं के जीवन को आसान बनाने और उनकी आय दोगुनी करने का जो संकल्प देश ने लिया है, उसमें पीएम किसान निधि की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज हमारे किसान आत्मनिर्भर भारत अभियान के भी अभिन्न अंग बन रहे हैं। इस योजना की शुरुआत 2019 में 24 फरवरी को हुई थी। इसके तहत सरकार किसानों के बैंक खातों में हर साल छह हजार रुपए जमा करती है। सरकार यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के खाते में डालती है।

इस योजना के दो साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का पेट भरने वाले मेहनतकश किसानों के जीवन में सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित करने के मकसद से इस योजना की शुरुआत की गई  थी। उन्होंने कहा- हमारे किसानों का तप और जुनून प्रेरित करने वाला है। मोदी ने कहा कि पिछले सात सालों में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें सिंचाई के लिए बेहतर प्रावधान से प्रौद्योगिक का इस्तेमाल, अधिक ऋण और बाजार उपलब्ध कराने से लेकर उचित फसल बीमा और मिट्टी की सेहत संबंधी जांच पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।

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