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बदलाव नहीं कानूनों की वापसी हो

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध में 27 दिन से दिल्ली की सीमा पर और देश के कई हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान सरकार से वार्ता के बारे में बुधवार को फैसला करेंगे। रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव की ओर से किसानों को चिट्ठी भेजी गई थी। उनसे कहा गया था कि वे अगर कृषि कानूनों में बदलाव चाहते हैं तो सरकार से वार्ता के लिए समय और तारीख बता दें। इस पर किसानों को मंगलवार को फैसला करना था लेकिन उन्होंने इस एक दिन और टाल दिया है। किसान नेता ने कहां वे कानून में बदलाव नहीं कानूनों की वापसी चाहते है।

किसान नेता कुलवंत सिंह संधु ने मंगलवार को सिंघु बार्डर पर प्रेस कांफ्रेंस में किसानों की आगे की रणनीति बताते हुए कहा- 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाले आयोजन के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भारत आने वाले हैं। हम वहां के सांसदों को लिखेंगे कि वे उन्हें भारत आने से रोकें। जब तक कि केंद्र सरकार किसानों की मांगें नहीं मान लेती। उन्होंने कहा कि केंद्र की चिट्‌ठी पर किसान बुधवार को फैसला करेंगे।

इससे पहले किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा- सरकार तय कर चुकी है कि कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। उन्होंने जो चिट्ठी जारी की है, उसमें लिखा है कि अगर किसान कानूनों में बदलाव चाहते हैं तो बातचीत की तारीख और समय बता दें। उन्होंने कहा- ये सरकार का समाधान के लिए कदम बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों से धोखा है। आम आदमी को लगेगा कि किसान जिद पर अड़े हैं, लेकिन हकीकत ये है कि हम कानूनों में बदलाव चाहते ही नहीं, बल्कि चाहते हैं कि ये वापस लिए जाएं।

उधर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि मंत्री से मीटिंग का न्योता नहीं मिला है। उन्होंने कहा- जब तक सरकार तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेती, किसान पीछे नहीं हटेंगे। सभी मुद्दे सुलझाने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लगेगा। सरकार हमारे पास आएगी। दूसरे किसान नेता हन्नान मुल्ला ने कहा कि सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है कि वह वार्ता चाहती है। हकीकत यह है कि वह एजेंडे पर चर्चा नहीं चाह रही है। किसानों का कहना है कि सरकार तीनों कानून रद्द करने और एमएसपी पर कानून लाने के बारे में बात करे।

इसके साथ ही दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर जहां-जहां किसान धरना दे रहे हैं, वहां भूख हड़ताल भी जारी है। हर दिन 11 किसान 24 घंटे के उपवास पर बैठ रहे हैं। किसानों ने यह भी ऐलान किया है कि हरियाणा में 25 से 27 दिसंबर तक टोल फ्री किए जाएंगे। इस बीच किसानों द्वारा गाजीपुर बॉर्डर जाम करने की वजह से पुलिस को मंगलवार को  दिल्ली से गाजियाबाद के रास्ते पर भी ट्रैफिक बंद करना पड़ा।

कृषि कानूनों के समर्थकों से मिले तोमर

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की तीन-चार डिग्री की ठंड में 27 दिन से प्रदर्शन कर रहे किसानों की बजाय केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों से मिले। तोमर ने बताया कि इन किसानों ने कृषि कानूनों का समर्थन किया और कहा कि इनमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है। कानून समर्थकों से मुलाकात के बाद तोमर ने कहा कि सरकार प्रदर्शन कर रहे किसानों से बात करने के लिए तैयार है।

तोमर ने मंगलवार को कहा- उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर की किसान संघर्ष समिति और नई दिल्ली की इंडियन किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इन कानूनों से किसान की हालत में सुधार होगा और इनमें बदलाव नहीं किए जाने चाहिए। प्रदर्शन कर रहे किसानों के बारे में उन्होंने कहा- उम्मीद है कि किसान संगठन जल्दी ही बातचीत शुरू करेंगे, जिससे जल्दी से जल्दी मामले को सुलझाया जा सके।

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- दो दिन पहले कृषि मंत्रालय की ओर से किसान संगठनों को पत्र भेजा गया था, सरकार खुले मन से किसान संगठन से बात करना चाहती है। अगर किसान बात करना चाहते हैं तो एक तारीख तय करके बताएं हम बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा- यह बात किसान संगठन को बताई गई थी। सरकार की नीयत साफ है, हम पूरी दृढ़ता के साथ नए कानूनों का फायदा सबके सामने रख रहे हैं।

किसानों ने खट्टर पर निकाला गुस्सा

केंद्रीय कृषि कानूनों से नाराज हरियाणा के किसानों ने मंगलवार को अपना गुस्सा राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर निकाला। अंबाला में किसानों ने उनकी गाड़ी रोक कर प्रदर्शन किया, उन्हें काले झंडे दिखाए और उनकी गाड़ी पर डंडे बरसाए। नाराज किसानों की पुलिस के साथ धक्कामुक्की भी हुई। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 27 दिन से आंदोलन चल रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन पर बैठे हैं तो राज्यों में भी अलग अलग जगहों पर किसानों के आंदोलन चल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि किसान शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे और मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखा रहे थे, लेकिन पुलिस ने मुख्यमंत्री को दूसरे रास्ते से निकालने की कोशिश की। इससे किसान भड़क गए और उन्होंने गाड़ियों पर डंडे मारने शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री जिस गाड़ी में थे, उस पर भी डंडे मारे तो पुलिस ने रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हुई, जिसमें कई किसानों की पगड़ी गिर गई। खट्टर अंबाला में नगर निगम चुनाव को लेकर बैठक करने आए थे। उसके बाद उन्हें भाजपा की मेयर पद की प्रत्याशी डॉ. वंदना शर्मा के समर्थन में जनसभा करनी थी। लेकिन, बैठक से निकलते ही किसानों ने उन्हें घेर लिया।

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