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Saturday, April 17, 2021
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वार्ता के लिए तैयार हैं किसान

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन सरकार के साथ वार्ता के लिए तैयार हो गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि वह वार्ता के लिए तारीख बताए, किसान तैयार हैं। राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए भाषण के बाद किसानों ने यह पहल की है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने किसानों से कहा कि वे आंदोलन खत्म करें और मिल बैठ कर चर्चा करें। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रास्ते खुले हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने पिछले महीने 30 जनवरी को भी किसानों से कहा था कि सरकार वार्ता के लिए तैयार है और एक फोन कॉल की दूरी पर है। तब भी किसानों ने कहा था कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं लेकिन उसके बाद सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई।

बहरहाल, बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की प्रधानमंत्री की अपील के चार-पांच घंटे बाद किसानों ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं। किसानों ने यह भी कहा कि सरकार वार्ता की तारीख तय करके बताए। मुश्किल यह है कि प्रधानमंत्री भले किसानों से अपील कर रहे हैं पर सरकार की ओर से वार्ता में शामिल मंत्रियों का कहना है कि किसान कानूनों को खत्म करने के अलावा कोई और प्रस्ताव लेकर आएं तो बातचीत होगी। जबकि किसान किसी शर्त के साथ वार्ता करने को तैयार नहीं हैं।

इसके बावजूद सोमवार को प्रधानमंत्री के भाषण के बाद किसानों ने वार्ता की पहल की। संयुक्त किसान मोर्चे के नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि वे अगले दौर की बातचीत के लिए तैयार हैं, सरकार उन्हें मीटिंग का दिन और समय बता दे। हालांकि उन्होंने मोदी द्वारा आंदोलनकारियों को आंदोलनजीवी कह के मजाक उड़ाने पर आपत्ति भी जताई। शिव कुमार कक्का ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन की अहम भूमिका होती है। लोगों को सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने का अधिकार है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि एमएसपी था, एमएसपी है और एमएसपी आगे भी रहेगा। किसानों ने उनके इस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों ने कभी नहीं कहा है कि एमएसपी खत्म हो रहा है। टिकैत ने कहा कि किसान सिर्फ इतना चाहते हैं कि सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का एक कानून बना दे। उन्होंने कहा- अगर सरकार एमएसपी पर कानून बना देती है तो पूरे देश के किसानों को इसका फायदा होगा। कानून नहीं होने से किसान ट्रेडर्स के हाथों लूटा जाता है।

प्रधानमंत्री के भाषण के बाद भारतीय किसान यूनियन उग्राहां, पंजाब के महासचिव सुखदेव सिंह ने सवालिया लहजे में कहा कि सरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर कानूनी गारंटी क्यों नहीं देना चाहती? उन्होंने आरोप लगाया कि मुद्दे को भटकाने की कोशिश की जा रही है।

मोदी ने किसानों को दिया भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों को कई तरह का भरोसा दिया है। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की व्यवस्था जारी रहने का वादा किया तो साथ ही यह भी कहा कि सरकार मंडियों की व्यवस्था को मजबूत कर रही है, उन्हें आधुनिक बना रही है। प्रधानमंत्री ने किसानों से आंदोलन खत्म करके सरकार से वार्ता करने की अपील भी की। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि सेक्टर और किसानों के लिए अपनी सरकार द्वारा किए गए कामों का विस्तार से जिक्र किया। कोरोना काल में देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज देने की योजना जारी रहने का ऐलान भी प्रधानमंत्री ने किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए उनसे आंदोलन खत्म करने की अपील की। उन्होंने कोई सवा घंटे के अपने भाषण में विपक्ष भी तंज किया और साथ ही किसान आंदोलनकारियों पर भी तंज किया। उन्होंने कृषि सुधारों की जरूरत बताते हुए यह भी कहा कि ये कानून किसानों के हक में हैं। प्रधानमंत्री ने चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टियों द्वारा किए गए हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- गालियां मेरे खाते में जाने दो। अच्छा आपके खाते में, बुरा मेरे खाते में। आओ, मिलकर अच्छा करें। आंदोलन में बूढ़े लोग भी बैठे हैं, इसे खत्म करें। आइए, मिल कर चर्चा करते हैं। ये समय खेती को खुशहाल बनाने का है, जिसे गंवाना नहीं है।

प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा- एमएसपी था, है और रहेगा। उन्होंने किसानों से यह भी कहा कि वे सदन की पवित्रता को समझें। मोदी ने आगे कहा- जिन 80 करोड़ लोगों को सस्ते में राशन मिलता है, वो जारी रहेगा। आबादी बढ़ रही है, जमीन के टुकड़े छोटे हो रहे हैं, हमें कुछ ऐसा करना होगा कि किसानी पर बोझ कम हो और किसान परिवार के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें। हम अपने ही राजनीतिक समीकरणों के फंसे रहेंगे तो कुछ नहीं हो पाएगा।

अपने सरकार के कामकाज की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा- भारत में जबरदस्त निवेश हो रहा है। एक तरफ निराशा का माहौल है। दूसरी तरफ डबल डिजिट में ग्रोथ का अनुमान है। हर महीने हम चार लाख करोड़ का डिजिटल ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। दुनिया में इसकी जय-जयकार हो रही है। उन्होंने कहा- 2014 में जब पहली बार सदन में आया था, तो कहा कि सरकार गरीबों को समर्पित है। आज फिर यही बात कहता हूं।

कोरोना वायरस की वैक्सीन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- जिस देश को थर्ड वर्ल्ड में गिना जाता है, वह देश इतने कम समय में वैक्सीन लेकर आ जाए तो गर्व होता है। मेरे देश में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। कोरोना ने दुनिया के साथ हमारे रिश्तों को नया आयाम दिया। भारत ने 150 देशों में मानवजाति की रक्षा के लिए दवा भेजी। कई देश कह रहे हैं कि हमारे पास भारत की वैक्सीन आ गई है।

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