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आंदोलन चलेगा अक्टूबर तक

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 69 दिन से चल रहा आंदोलन अभी खत्म नहीं होने जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि यह आंदोलन अक्टूबर तक चलेगा। हालांकि उन्होंने इसका कोई कारण नहीं बताया। वैसे पहले भी किसान नेता कहते रहे हैं कि वे छह महीने तक आंदोलन की तैयारी करके आए हैं। टिकैत किसानों की मांग का सम्मानजनक समाधान निकालने की बात कहने के एक दिन बाद पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि कानून वापसी तक आंदोलन चलेगा।

गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश  टिकैत ने ऐसे संकेत दिए थे, जिनसे लगा था कि वे सरकार के साथ बातचीत करके किसान आंदोलन खत्म करने की पहल करेंगे। लेकिन मंगलवार को टिकैत ने तेवर सख्त कर लिए। उन्होंने मंगलवार को सड़क पर बैठ कर रोटी आई और सरकार पर आरोप लगाया कि वह रोटी को तिजोरी में बंद करना चाहती है।

टिकैत ने दो टूक अंदाज में कहा- यह आंदोलन जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। अक्टूबर से पहले इसका समाधान नहीं निकल सकता। हमारा नारा है, कानून वापसी नहीं, तो घर वापसी नहीं। एक तरफ किसान कानून वापसी से कम किसी और बात पर राजी नहीं हैं तो दूसरी ओर सरकार का कहना है कि कानून वापसी को छोड़ कर बाकी किसी भी प्रस्ताव पर वार्ता के लिए वह तैयार है। सरकार के साथ किसानों की अब तक 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता राकेश टिकैत ने दिल्ली की सीमा पर चारों तरफ नए बैरिकेड्स लगाने, तारों की बाड़ लगाने और सड़क पर कीलें बिछाने पर तंज करते हुए कहा कि सरकार किलेबंदी के बाद रोटीबंदी करेगी। इसके विरोध में राकेश टिकैत ने सड़क पर बैठ कर रोटी खाई और विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा- सरकार खाने को तिजोरी में बंद करना चाहती है, इसलिए हम सड़क पर बैठकर खाना खा रहे हैं।

इस बीच दिल्ली सीमा पर किसानों ने आंदोलन को चलाए रखने की सारी व्यवस्था खुद कर ली है। जहां-जहां प्रशासन ने बिजली काट दी है वहां किसानों ने जेनरेटर लगवा लिए हैं। किसान राशन-पानी के साथ-साथ बिजली की व्यवस्था भी खुद ही कर रहे हैं। एक जेनरेटर से तीन सौ तंबुओं में बिजली पहुंचाई जा रही है। गणतंत्र दिवस की घटना के बाद लग रहा था कि किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है पर किसानों ने फिर से पहले जैसी व्यवस्था बना ली है। साथ ही हर सीमा पर किसानों की संख्या बढ़ रही है।

मंगलवार को हरियाणा में हिसार-सिरसा सीमा पर हजारों की संख्या में किसान पहुंच गए और टोल प्लाजा के पास उन्होंने हाईवे जाम कर दिया। गाजीपुर, टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर भी नए किसानों का पहुंचना जारी है। पानीपत टोल प्लाजा के पास भी बड़ी संख्या में किसानों ने डेरा जमा लिया है। किसानों ने छह फरवरी को तीन घंटे के लिए चक्का जाम करने का फैसला किया है। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि जिन 128 लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनकी कानूनी मदद के लिए एक कमेटी बनाई गई है। उधर हरियाणा सरकार ने सात जिलों में इंटरनेट बंद रखने की सीमा तीन फरवरी तक बढ़ा दी है।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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