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किसानों की भूख हड़ताल शुरू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दिल्ली की सीमा पर जहां-जहां किसान आंदोलन कर रहे हैं वहां 11-11 किसानों की टीम भूख हड़ताल पर बैठी। ये किसान 24 घंटे तक उपवास करेंगे और फिर उनकी जगह दूसरी टीम आ जाएगी। किसानों ने ऐलान किया है कि तीनों कानून वापस होने तक यह क्रम चलता रहेगा। इस बीच 23 दिसंबर को किसान दिवस के दिन हर जगह किसान भूख हड़ताल करेंगे। किसानों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान करते हुए यह भी कहा है कि 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में टोल फ्री किया जाएगा।

इस बीच सोमवार को किसान आंदोलन के 26वें दिन आंदोलन में शामिल एक और किसान ने दिल्ली-हरियाणा सिंघु बॉर्डर पर खुदकुशी करने की कोशिश की। तरणतारण के किसान निरंजन सिंह ने सोमवार को जहर खाकर जान देने की कोशिश की। उन्हें रोहतक के एक अस्पताल में भरती कराया गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। उन्होंने कहा- जब सुसाइड जैसी घटनाएं होती हैं, तभी यह सरकार हरकत में आती है। आमतौर पर, जब कोई सुसाइड करता है, तो उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करने वाले को पुलिस पकड़ती है। मेरे केस में अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि किसान आंदोलन के बाद से इससे जुड़े दो लोग खुदकुशी कर चुके हैं।

किसानों ने रविवार को ही ऐलान किया था कि सोमवार से भूख हड़ताल शुरू होगी। इस ऐलान के पांच घंटे बाद ही केंद्र सरकार ने किसानों से बातचीत के न्योते की चिट्ठी भेजी। इसमें कहा गया है कि वार्ता की तारीख किसानों ही तय करें। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव की चिट्ठी मिलने के बाद किसानों ने कहा कि वे इस पर विचार करके फैसला करेंगे। इससे पहले रविवार को दिन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की एक रैली में कहा था कि जल्दी ही सरकार किसानों से बात करेगी।

किसानों ने देश भर के लोगों से ऐलान किया है कि 23 दिसंबर को किसान दिवस के रोज उपवास करके किसानों का समर्थन करें। इसके बाद 26 और 27 दिसंबर को किसान केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल घटक दलों के नेताओं से मिल कर उनसे अपील करेंगे कि वे सरकार पर दबाव डालें और तीनों कानून वापस करवाएं। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ भी प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। किसानों ने यह भी कहा कि अडानी-अंबानी का बायकॉट जारी रहेगा और आढ़तियों पर छापेमारी के विरोध में किसान आय कर कार्यालयों के बाहर भी प्रदर्शन करेंगे।

इस बीच फेसबुक पर किसानों के पेज ब्लॉक करने के आरोप पर फेसबुक ने सोमवार को सफाई दी। फेसबुक प्रवक्ता ने कहा- फेसबुक पेज ‘किसान एकता मोर्चा’ पर अचानक बढ़ी एक्टिविटी की वजह से हमारे ऑटोमेटेड सिस्टम ने इसे स्पैम कर दिया, क्योंकि इससे हमारे मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। हालांकि, मामले को समझने के बाद हमने तीन घंटे के अंदर ही पेज को रिस्टोर कर दिया।

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