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नई चिट्ठी, दोहराई बाते!

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों के किसान दिल्ली की कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा पर 29 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्र सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय उनको चिट्ठी लिख रही है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को पांच दिन के के अंदर दूसरी चिट्ठी किसानों को लिखी, जिसमें पुरानी बातों को दोहराते हुए कहा गया कि सरकार हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। इसमें एक बार फिर गेंद किसानों के पाले में डालते हुए केंद्र सरकार ने लिखा कि बातचीत  की तारीख और समय किसान खुद तय करें।

सरकार की ऐसी ही एक चिट्ठी का जवाब देते हुए बुधवार को किसान संगठनों ने कहा था कि केंद्र सरकार कोई ठोस प्रस्ताव दे तभी किसान वार्ता करेंगे। लेकिन ठोस प्रस्ताव देने की बजाय अपनी बला टालने के अंदाज में केंद्र सरकार ने किसानों को चिट्ठी लिख दी, जिसमें हजार बार कही जा चुकी यह बात लिखी गई कि सरकार वार्ता के लिए तैयार है और किसान वार्ता की तारीख और समय तय करें।

किसान आंदोलन के 29वें दिन गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से किसानों को लिखी गई चिट्ठी मे सरकार ने कहा कि किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए सरकार गंभीर है। साथ ही सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से जुड़ी कोई भी नई मांग जो नए कृषि कानूनों के दायरे से बाहर है, उसे बातचीत में शामिल करना तर्कसंगत नहीं होगा। गौरतलब है कि किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी चाहते हैं, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक फैसला बता कर लिखित गारंटी देने की बात कर रही है। किसान चाहते हैं कि सरकार तीनों कानूनों को रद्द करे और एमएसपी अनिवार्य करने का कानून बनाए।

तभी बुधवार को किसानों ने सरकार के पिछले न्योते को ठुकरा दिया था। किसानों ने कहा था कि सरकार के प्रस्ताव में दम नहीं। किसान नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि सरकार कोई ठोस प्रस्ताव दे तभी बात होगी। बहरहाल, गुरुवार को लिखी गई चिट्ठी से पहले सरकार ने 20 दिसंबर को किसान नेताओं को पत्र लिख कर बातचीत का समय तय करने को कहा था, जिसे किसानों ने बुधवार को नकार दिया था। किसानों ने यह भी कहा था कि सरकार आंदोलन को हलके में न ले और आग से खेलना बंद करे।

राष्ट्रपति से मिले राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर किसानों का मसला लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। इस बार राहुल गांधी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं गुलाम नबी आजाद और अधीर रंजन चौधरी के साथ गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले और उनसे किसानों के मामले में दखल देने की अपील की। कांग्रेस नेताओं ने दो करोड़ किसानों के दस्तखत वाला एक ज्ञापन भी राष्ट्रपति को सौंपे। इससे पहले राहुल गांधी एनसीपी प्रमुख शरद पवार और सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी सहित कई विपक्षी नेताओं के साथ राष्ट्रपति से मिलने गए थे।

राष्ट्रपति भवन से निकलने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से कहा- किसान, छोटे व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अगर कृषि व्यवस्था को छेड़ा जाएगा, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा इसलिए ऐसे कानूनों को वापस लेना चाहिए। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा- प्रधानमंत्री सिर्फ दो-तीन लोगों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया पर जैसा कि सभी जानते हैं कि किसान आंदोलनकारी भी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार सिर्फ अंबानी और अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में लोकतंत्र खत्म होने का आरोप लगाते हुए कहा- आज देश में लोकतंत्र नहीं बचा है। पीटना और हिरासत में लेना इस सरकार का काम बन गया है। सरकार की इन नीतियों की वजह से देश में किसी युवा को नौकरी नहीं मिलेगी। छोटे व्यापार खत्म हो जाएंगे। मोदी क्रोनी कैपिटलिस्ट के लिए पैसा बना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में अब आभासी लोकतंत्र बचा है।

प्रियंका ने निकाला मार्च

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वार्डा ने गुरुवार को किसानों के समर्थन में में कृषि कानूनों को खत्म करने के लिए एक मार्च निकाला। प्रियंका ने धारा 144 लागू होने के बावजूद विजय चौक से लेकर राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन उनको पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बावजूद प्रियंका आगे बढ़ीं तो पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया। उनके साथ कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित और भी कई नेता हिरासत में लिए गए। बाद में सबको छोड़ दिया गया।

प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने पर राहुल गांधी ने कहा- मोदी के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश करने वाले को आतंकी करार दे दिया जाएगा, भले ही मोहन भागवत ही क्यों न हों। केंद्र पर हमला करते हुए प्रियंका ने कहा- भाजपा नेता और समर्थक किसानों के लिए जो शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं, वह पाप है। अगर सरकार किसानों को देश विरोधी कहती है तो, सरकार पापी है। किसानों की समस्या का हल तब निकलेगा, जब सरकार उनका आदर करेगी। इस सरकार के खिलाफ किसी भी तरह के असंतोष को आतंक के नजरिए से देखा जा रहा है।

प्रियंका केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं पर तंज करते हुए कहा- कभी वे कहते हैं कि हम इतने कमजोर हैं कि विपक्ष के लायक ही नहीं। कभी कहते हैं कि हम इतने ताकतवर हैं कि हमने दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के लिए लाखों कैंप बना दिए। पहले उन्हें तय करना चाहिए कि हम क्या हैं?

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