किसानों को नामंजूर प्रस्ताव

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों की सरकार के साथ 11वें दौर की वार्ता शुक्रवार को होगी। लेकिन उससे पहले किसानों ने सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। असल में बुधवार को हुई वार्ता में केंद्र सरकार ने किसानों के सामने प्रस्ताव रखा था कि सरकार तीनों कानूनों पर अमल को डेढ़ साल के लिए टाल देगी और इस बीच एक कमेटी बना देगी, जो कानूनों के प्रावधानों और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी के मुद्दे पर वार्ता करेगी। किसानों ने गुरुवार को इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया।

पिछले 57 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को सिरे से नकारने की बजाय कहा था कि वे इस पर विचार करेंगे। यह पहली बार था, जब किसानों ने सरकार के किसी प्रस्ताव को ठुकराने की बजाय इस पर विचार करने का भरोसा दिया। इसके बाद गुरुवार को टिकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई, जिस में सरकार के प्रस्ताव पर विचार किया गया। किसानों ने इसे मंजूर नहीं करने का फैसला किया।

संयुक्त किसान मोर्चा की जनरल बॉडी मीटिंग में किसानों ने कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की अपनी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा। किसान संगठनों के इस रुख के बाद शुक्रवार की वार्ता में भी कोई समाधान निकलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। हालांकि बुधवार की वार्ता के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उम्मीद जताई थी कि 22 जनवरी को कुछ समाधान निकल सकता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही केंद्र के बनाए इन तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है। अदालत ने एक कमेटी भी बनाई है, जो किसानों और सरकार से इस मुद्दे पर बात करेगी और सर्वोच्च अदालत को अपनी रिपोर्ट देगी। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह एक हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट को बता देगी कि वह कानूनों पर रोक लगा रही है। गौरतलब है कि इन कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं अदालत में लंबित हैं। सरकार के हलफनामे के बाद अदालत इन पर सुनवाई रोक सकती है।

पुलिस-किसान वार्ता बेनतीजा

गणतंत्र दिवस के रोज 26 जनवरी को किसान दिल्ली के बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। यह बात किसान संगठनों ने पुलिस के साथ गुरुवार को हुई बैठक में दो टूक अंदाज में बता दिया है। दूसरी तरफ पुलिस ने किसानों से कहा कि वे 26 जनवरी को केएमपी यानी कोंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर रैली निकालें, जिसे किसानों ने खारिज कर दिया। इस तरह किसान संगठनों और पुलिस के बीच गुरुवार की बैठक बेनतीजा रही। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन पिछले 57 दिन से आंदोलन कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके ट्रैक्टर रैली पर रोक लगवाने का प्रयास किया था पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानून-व्यवस्था का मुद्दा बताते हुए दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि पुलिस ही इस पर फैसला करेगी। उसके बाद से पुलिस के साथ किसान संगठनों की दो दौर की वार्ता हो चुकी है। गुरुवार को दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ किसान संगठनों बैठक हुई। बैठक में किसानों ने साफ किया है कि वे हर हाल में दिल्ली के बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह गणतंत्र दिवस को देखते हुए बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली की इजाजत नहीं दे सकती है। दिल्ली पुलिस ने सुझाव दिया कि किसान केएमपी एक्सप्रेसवे पर अपना ट्रैक्टर मार्च निकालें। गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाले सुरक्षा बंदोबस्तों और सैन्य परेड के हवाले से दिल्ली पुलिस ट्रैक्टर रैली की मंजूरी देने में हिचक रही है।

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