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वार्ता बेनतीजा, आंदोलन जारी

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों के साथ सरकार की वार्ता एक बार फिर विफल हो गई। गुरुवार को सात घंटे से ज्यादा समय तक चली वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकला, जिसके बाद तय हुआ कि पांच दिसंबर को फिर से बातचीत होगी। गुरुवार को लगभग पूरे दिन चली बातचीत में देश के अलग अलग राज्यों के 35 किसान संगठनों के साथ केंद्र सरकार के तीन मंत्रियों ने बातचीत की। वार्ता के दौरान किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग दोहराते रहे। वार्ता के बाद किसान फिर दिल्ली की सीमा पर लौट गए, जहां उनका आंदोलन चल रहा है।

सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वार्ता के दौरान किसानों की आपत्तियों को दूर करने का प्रयास करते हुए यह भरोसा दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की व्यवस्था को हाथ नहीं लगाया जाएगा, यह पहले की तरह चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधानों में किसानों को सुरक्षा दी गई है। उनकी जमीन की लिखा-पढ़ी कोई नहीं कर सकता है। उन्होंने खरीदारों के रजिस्ट्रेशन का वादा भी किया। दूसरी ओर किसान संगठनों का कहना है कि उनकी पांच आपत्तियां हैं, जिनमें से सरकार ने सिर्फ एक पर वादा किया और बाकी पर सिर्फ मुंहजबानी भरोसा देती रही।

इससे पहले गुरुवार को किसानों के प्रदर्शन के आठवें दिन दोपहर साढ़े 12 बजे के करीब दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान संगठनों के बीच वार्ता शुरू हुई। वार्ता के बीच में दोपहर के भोजन का ब्रेक भी, जिसमें सरकार ने किसानों को भोजन का प्रस्ताव दिया। लेकिन किसानों ने सरकारी खाना खाने से मना कर दिया। वे अपना खाना साथ लाए थे, वहीं खाया और फिर अपनी लाई चाय पीकर वापस वार्ता में शामिल हुए।

किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांगें दोहराते हुए कहा कि संसद का विशेष सत्र बुला कर तीनों कृषि कानूनों को खत्म कर दिया जाए। किसान संगठनों ने एक दिन पहले बुधवार को अपनी बैठक में तय किया था कि वे सरकार से संसद का विशेष सत्र बुला कर तीनों कानूनों को खत्म करने की मांग करेंगे। किसान संगठनों ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस करके भी इसकी भी जानकारी दे दी थी।

किसानों की सारी बातें सुनने के करीब सात घंटे के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों की चिंताओं पर जवाब देना शुरू किया। उन्होंने कहा कि एमएसपी को छुआ नहीं जाएगा। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह किसानों की एक बड़ी मांग है कि सरकार एमएसपी पर खरीद अनिवार्य करे और देश में कहीं भी इससे कम कीमत पर होने वाली खरीद-फरोख्त को गैरकानूनी घोषित करे। सरकार ने इस पर किसानों को भरोसा दिया है। पर किसान इतने से संतुष्ट नहीं हैं। वे तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

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