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किसानों ने जवाब और चेतावनी दी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने ठीक एक हफ्ते बाद केंद्र सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा है। किसान संगठनों ने कहा है कि उन्होंने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही किसान संगठनों ने केंद्र सरकार को चेतावनी देने के अंदाज में यह भी कहा है कि वह किसानों के आंदोलन को बदनाम करना बंद करे और दूसरे किसान संगठनों के साथ सामानांतर बातचीत भी बंद करे। गौरतलब है कि देश के कुछ राज्यों के किसान संगठनों से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बातचीत की है। इन संगठनों ने सरकार के कानूनों का समर्थन किया है।

केंद्र के बनाए तीन कानूनों के खिलाफ पिछले 21 दिन से प्रदर्शन कर रहे 40 किसान संगठनों के साझा मोर्चा ने बुधवार को केंद्र सरकार को एक चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में किसान संगठनों ने कहा कि विवादित कानूनों पर अन्य किसान संगठनों से समानांतर बातचीत न करे। संयुक्त किसान मोर्चा की यह चिटठी इस लिहाज से अहम है क्योंकि आठ दिसंबर के बाद से सरकार और किसान संगठनों की बातचीत बंद है। कृषि मंत्री ने कहा था कि वे किसानों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। सो, सरकार को बुधवार को किसानों का औपचारिक जवाब मिल गया है।

केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को लिखी चिट्ठी में मोर्चे ने कहा कि केंद्र को दिल्ली से लगी सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शन को बदनाम करना भी बंद करना चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य दर्शन पाल ने हिंदी में लिखी इस चिट्ठी में कहा है- हम चाहते हैं कि सरकार किसानों के आंदोलन को बदनाम करना और अन्य किसान संगठनों के साथ समानांतर बातचीत करना बंद करे।

अपनी चिट्ठी में दर्शन पाल ने सरकार के नए कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज करने के किसान यूनियन के फैसले की भी लिखित में जानकारी दी। गौरतलब है कि पिछले बुधवार यानी नौ दिसंबर को सरकार ने यह प्रस्ताव किसानों को भेजा था। किसान मोर्चा ने विवेक अग्रवार को भेजी अपनी चिट्ठी में कहा है- भेजे गए प्रस्ताव और आपके पत्र के संदर्भ में, हम सरकार को बताना चाहते हैं कि किसानों ने उसी दिन एक संयुक्त बैठक कर प्रस्ताव पर चर्चा की और उसे खारिज कर दिया।

दर्शन पाल ने कहा- हमने पिछली बातचीत में ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। किसानों की पिछली बातचीत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई थी, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला था। इसके अगले दिन नौ दिसंबर को कृषि मंत्री के साथ  किसानों का वार्ता होनी थी, जिसे रद्द कर दिया गया और उसके बदले केंद्र सरकार ने 22 पन्नों का एक प्रस्ताव किसानों के भेजा था। किसानों ने उसी प्रस्ताव को खारिज करने की औपचारिक सूचना केंद्र को दी है।

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