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Saturday, April 17, 2021
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आंदोलन पर अदालत चिंतित

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नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने पिछले 42 दिन से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर चिंता जताई है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों को रद्द करने और किसानों के आंदोलन को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि स्थिति में कोई सुधार नहीं है। हालांकि केंद्र ने अदालत को भरोसा दिलाया कि बातचीत चल रही है और उससे समाधान निकल सकता है। इसके बाद अदालत ने अगले हफ्ते के लिए सुनवाई टाल दी। अब इस मामले की सुनवाई 11 जनवरी को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि स्थिति में कोई सुधार नहीं है। चीफ जस्टिस ने इसके साथ ही कहा कि वे किसानों की हालत समझ रहे हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने भी कृषि कानूनों और किसान आंदोलन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई की थी। उस समय अदालत ने कहा था कि जब तक सुनवाई चल रही तब तक सरकार कृषि कानूनों पर रोक लगाने के बारे में विचार करे। अदालत ने यह भी कहा था कि शांतिपूर्ण आंदोलन करना संविधान से दिया गया अधिकार है, जिस पर अदालत रोक नहीं लगा सकती है।

बहरहाल, बुधवार को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए अटॉर्नी जनरल और सॉलिसीटर जनरल ने कहा- किसानों से अच्छे माहौल में बातचीत हो रही है। हो सकता है कि आने वाले समय में कोई नतीजा निकल आए, इसलिए फिलहाल सुनवाई करना ठीक नहीं होगा। कोर्ट ने इस बात को मान लिया और सुनवाई सोमवार तक टाल दी और साथ ही कहा कि किसानों से बातचीत जारी रखें। हालांकि केंद्र सरकार के साथ अब तक हुई कई दौर की वार्ता में कोई समाधान नहीं निकला है। अगली वार्ता आठ जनवरी को होने वाली है पर किसानों ने पहले ही कह दिया है कि उनको आठ जनवरी को भी किसी समाधान की उम्मीद नहीं है। किसान तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।

इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। उन्होंने कहा है- हमारे दिमाग में बिल्कुल साफ है कि ये कानून किसान विरोधी हैं। हम इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। कांग्रेस शासित बाकी राज्यों ने भी विधानसभा में केंद्रीय कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है और अपना कानून बना कर मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा है। राज्य सरकारें अदालत जाने से पहले राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार कर रही हैं।

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